मौत से थोड़ी देर पहले मांगे थे बिस्किट
इन बच्चों के पिता करनपाल का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने रोते हुए बताया कि वह सुबह नौ बजे जब गुरसराय काम से जा रहे थे तो दोनों बच्चे साथ चलने की जिद करने लगे। किसी तरह उन्हें समझाया तो दोनों ने पिता से शर्त रख दी कि उन्हें साथ नहीं ले जा रहे हैं तो लौटते समय बिस्किट लेते आना।
एक घंटे बाद करन घर लौटे तो बच्चे अपनी मां पूनम के पास बातचीत कर रहे थे। करनपाल खाना खाने बैठ गए और इसी दौरान बच्चे सामने बने मचान पर खेलने चले गए। बिस्किट के पैकेट थैले में ही रखे थे कि बच्चे खेलकर आएंगे तो उन्हें दे दिए जाएंगे।
पर, किसे मालूम था कि अपने पिता से जो आखिरी फरमाइश सिम्मी (3) और विशाल (2) ने की थी वह उसे पूरा किए बिना ही इस दुनिया से विदा ले लेंगे।
खेलने की बात कहकर गए और हमेशा के लिए चले गए
बच्चों की मां पूनम ने रुंधे हुए गले से बताया कि घटना के आधा घंटे पहले ही तीनों बच्चे उनके पास आकर कह रहे थे कि हमलोग दोपहर में मचान के नीचे बने टपरा में लगी चारपाई पर ही खेलने जा रहे हैं, लेकिन कुछ देर बाद ही टपरा में आग लग गई देखते ही देखते जिगर के टुकड़े बुरी तरह से झुलस गए। बड़ी बेटी संजना ने किसी प्रकार कूदकर अपनी जान बचाई।