झांसी। संचालन की मंजूरी मिलने के बाद भी उद्योगों का पहिया अपनी रफ्तार से नहीं घूम पा रहा है। लॉकडाउन की शुरुआत के साथ से औद्योगिक इकाइयों में पसरी खामोशी अभी भी बरकरार बनी हुई है। कहीं कर्मचारियों की कमी आड़े आ रही है तो कहीं तैयार माल को खपाने के लिए बाजार नहीं मिल रहा है। इसके अलावा भी तमाम दुश्वारियां उद्यमियों के सामने आ रही हैं।
कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए 25 मार्च से लॉकडाउन की शुरुआत हुई थी। इसके साथ ही औद्योगिक इकाइयों को बंद कर दिया गया था। लॉकडाउन - 3 में इन्हें शर्तों के साथ खोलने की मंजूरी दी गई है। संचालन के दौरान सभी इकाइयों में कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन करना होगा। बिजौली औद्योगिक क्षेत्र में लगभग तीन दर्जन इकाइयों को खोलने की मंजूरी ली गई है, लेकिन इनमें से आधा दर्जन इकाइयां ही संचालित हो पा रही हैं। तमाम कोशिशों के बाद भी उद्यमियों के लिए संचालन का माहौल नहीं बन रहा है। इसमें तमाम दिक्कतें सामने आ रही हैं, जिसका हल फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बिजौली में एक पेपर इकाई है। इसमें काम करने वाले लगभग सत्तर कुशल श्रमिक अपने गृह जनपद मथुरा में फंसे हुए हैं। आवागमन बंद होने की वजह से वे वहां से नहीं लौट पा रहे हैं, जिससे इकाई का संचालन रुका हुआ है। इन्हीं तरह की परेशानियों से अन्य औद्योगिक इकाइयों को भी गुजरना पड़ रहा है।
ये आ रही हैं समस्या
- काम करने के लिए नहीं मिल पा रहे हैं श्रमिक
- मशीनों के संचालन के लिए नहीं आ पा रहे हैं ऑपरेटर
- कच्चा माल आसानी से नहीं हो पा रहा है उपलब्ध
- तैयार माल को खपाने के लिए नहीं मिल पा रहा है बाजार
- फंसी हुई पुरानी उधारी वापस नहीं मिल रही
- तैयार माल का नहीं हो रहा है नकद भुगतान
लगभग तीन दर्जन इकाइयों ने संचालन की मंजूरी ली है, लेकिन चल सिर्फ आधा दर्जन ही रही हैं। श्रमिकों की समस्या, कच्चे माल की अनुपलब्धता, तैयार माल के लिए बाजार की कमी जैसी समस्याओं की वजह से उद्योगों का पहिया अपनी रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। क्षेत्रीय उद्योगों के विकास के लिए भेल, रेलवे जैसी इकाइयां आगे आएं। वे बाहर से माल मंगवाने की जगह स्थानीय उद्यमियों से लें।
- राजेश शर्मा, अध्यक्ष - चैंबर ऑफ स्माल एंड माइक्रो इंडस्ट्री
सरकार और विभाग की ओर से औद्योगिक इकाइयों के संचालन के लिए पूरा प्रोत्साहन दिया जा रहा है। बावजूद, मंजूरी लेने के बाद भी तमाम इकाइयां भी संचालित नहीं हो पा रही हैं। इसमें उनकी कारोबारी समस्याएं सामने आ रही हैं। हालांकि, इसका जल्द निस्तारण कर लिया जाएगा। आने वाले कुछ समय में स्थितियां बेहतर हो जाएंगी। उद्योग भी चलेंगे और उनके रोजगार भी सृजित होंगे।
- गिरीश कुमार शाक्य, क्षेत्रीय प्रबंधक - यूपीएसआईडीसी