हादसे की सूचना मिलते ही आशीष के मां-बाप बदहवास हो उठे। तुरंत वह लोग इंदौर पहुंचे लेकिन, अपने जवान बेटे का मुंह नहीं देख सके। उसके सिर पर सेहरा देखने की तमन्ना बांधे मां-बाप को एक सिरफिरे की करतूत की वजह से उसके नाममात्र बचे शरीर का अंतिम संस्कार करके वापस लौट आना पड़ा। पूरे रास्ते आशीष को याद करते हुए मां कल्पना बिलखती रहीं। पिता किसी तरह चुप कराने की कोशिश कर रहे थे लेकिन, उनके आंखें भी डबडबाई थीं।
सोमवार को इंदौर से वापस लौटने के बाद उन्होंने बताया कि आशीष झांसी में उनके साथ आरओ वाटर प्लांट के काम में हाथ बंटता था लेकिन, पिछले कुछ महीने से वह अपना काम शुरू करने की धुन में था। फरवरी माह में ही वह इंदौर चला गया। यहां उसने शेयर ट्रेडिंग टर्मिनल शुरू किया था। पिता का कहना है आशीष पढ़ने-लिखने में जहीन था। उधर, नाते-रिश्तेदारों तक जैसे ही यहखबर पहुंची उनका भी जमावड़ा लगना शुरू हो गया। घर में आशीष से छोटे दो ओम और वसु हैं।