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झांसी: भारत और रूस की सेना का संयुक्त युद्धाभ्यास शुरू, दोनों देश करेंगे क्षमता का प्रदर्शन

Wed, 11 Dec 2019 12:39 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
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‘इंद्र 2019’ - फोटो : अमर उजाला
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झांसी। कूटनीतिक नजदीकियों से आगे बढ़ते हुए भारत-रूस आतंकवाद और दुश्मनों के खिलाफ साझा रणकौशल विकसित कर रहे हैं। भारत में पहली बार रूस की थल सेना, नौ सेना और वायुसेना भारतीय समकक्ष के साथ युद्धाभ्यास करने आई हैं। झांसी की बबीना छावनी में दस दिवसीय संयुक्त युद्धाभ्यास इंद्र-2019 का भव्य शुभारंभ हुआ। इस दौरान टैंकों की परेड, वायु करतब आकर्षण का केंद्र रहे। बबीना के साथ ही महाराष्ट्र के पुणे और गोवा में भी दोनों देशों की वायु और नौसेना अपने-अपने पराक्रम का प्रदर्शन करेंगी।

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बुधवार को इंद्र 2019 के उद्घाटन पर रूस के पूर्वी सैन्य जिले की 5वीं सेना के प्रमुख मेजर जनरल सेकोव ओलेग और भारतीय सेना की दक्षिणी कमान के स्टाफ अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल डीएस आहूजा ने कहा कि इंद्र 2019 दोनों देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक तैयारी है। दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे से अनुभव और कुशलता साझा करेंगी। युद्ध या आतंक विरोधी कार्रवाई में एक साथ आक्रमण करने, सामंजस्य बैठाने का प्रयास करेंगी।
वायु सेना के साथ संयुक्त ऑपरेशन, आबादी के बीच सैन्य कार्रवाई, आतंकियों की खोज कर उनका खात्मा, सड़क खोलना, आग के बीच कार्रवाई और बचाव कार्य, समुद्र में छिपे आतंकियों का सफाया, युद्धक विमान और मानव रहित विमानों व टैंकों से दुश्मन का सर्वनाश आदि अभ्यास का हिस्सा रहेंगे। दोनों अधिकारियों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के मानकों पर अगर किसी तीसरे देश को भी शांति स्थापना के लिए सैन्य सहायता की जरूरत पड़ती है तो मुहैया कराई जाएगी।
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खास बात
- सैन्याभ्यास इंद्र  की शुरुआत 2003 में हुई। अब तक यह पांच बार रूस और पांच बार भारत में हो चुका है।
- तीनों सैन्य इकाईयों के साथ पहली बार 2017 में रूस में युद्धाभ्यास हुआ था। भारत में इस वर्ष पहली बार हो रहा है।
- बबीना, पुणे और गोवा में एक साथ होगा, कमान मुख्यालय बबीना में ही रहेगा।  
 
पैराट्रूपर्स ने दिखाए करतब
समारोह में भारतीय पैराट्रूपर्स ने हैरतंगेज करतब दिखा कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। वायुसेना की आकाशगंगा टीम के सदस्यों ने 120 मील प्रति घंटे की रफ्तार से पैराशूट से नीचे उतरते हुए तिरंगा लहराया। साथ ही तीन पैराशूट ने एक साथ नीचे उतरने का करतब दिखाया।

महाराष्ट्र के मल्लखंभ और केरल के कलारीपट्टू ने बांधा समा
भारतीय सेना के जवानों ने महाराष्ट्र के खास मल्लखंभ कला का प्रदर्शन किया। साथ ही, विश्व की प्राचीनतम युद्धकलाओं में एक केरल की पारंपरिक युद्ध कला कलारीपट्टूू को दिखाया। इसमें तलवारबाजी व अन्य हथियारों से हमला, बचाव शामिल था।

हवा में दिखाईं कलाबाजियां, बनाई दिल की संरचना
परिंदों को नहीं दी जाती तालीम उड़ान की, वो खुद ही तय करते हैं मंजिल आसमान की। रखता है जो हौसला आसमान को छूने का, उसको नहीं होती परवाह गिर जाने की...। इन पंक्तियों को सही साबित करते हुए वायु सेना के सारंग हेलीकॉप्टरों की खेप ने आसमान में एक से एक हैरतअंगेज करतब दिखाए। वहां मौजूद सभी दर्शक एकटक आकाश निहारते रहे। जमीन से मात्र 50 मीटर की ऊंचाई पर एक दूसरे का आमना-सामना, हवा में कलाबाजियां, इंडिया के लिए ‘आई’ की संरचना में उड़ान भरना, उड़ान भरते हुए दिल की संरचना बनाना दिखाया।

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