गर्मी के दिनों में लगातार बढ़ रहा तापमान अस्थमा रोगियों के लिए परेशानी पैदा कर रहा है। इन दिनों श्वांस रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। गर्म हवाओं के साथ आने वाले धूलकण, सूखे पत्ते, गेहूं फसल की निकासी से निकले वाले भूसा और परागकरण अस्थमा रोगियों की सांसें मंद कर रहे हैं।
लक्षण
-श्वांस नलिकाएं प्रभावित होती हैं।
-नलियों में सूजन आ जाती है।
-अटैक होने पर सांस लेने में दिक्कत।
-तत्काल इलाज नहीं मिले तो जान जा सकती है।
ऐसे करें बचाव
खूब पानी व फलों का ताजा जूस पीना चाहिए। घर से बाहर निकलते समय नाक, मुंह को मास्क, कपड़े से ढक लें। एसी में रहने वाले सतर्कता बरतें, क्योंकि बदला वातावरण अस्थमा अटैक को बढ़ा सकता है।
- डॉ. मधुर्मय शास्त्री, विभागाध्यक्ष, चेस्ट रोग, मेडिकल कॉलेज।
टीबी फैलती है
डॉ. मधुर्मय ने बताया कि डिहाइड्रेशन की वजह टीबी के मरीजों की सांस फूलना, बुखार आना, वजन कम होने की समस्या बढ़ जाती है। वहीं, टीबी के जीवाणु हवा से फैलते हैं।े उमस भरी गर्मी में टीबी के जीवाणु बीमारी फैलाने का खतरा बढ़ जाता है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में टीबी मरीजों की संख्या 15 फीसदी बढ़ गई है।