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पति - पत्नी के बीच बढ़ रही तकरार

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पति - पत्नी के बीच बढ़ रही तकरार
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झांसी। शादी को बमुश्किल दो महीने भी नहीं हुए और पति-पत्नी के बीच विवाद होने लगा। तमाम कोशिशों के बाद भी परिजन दोनों के बीच समझौता नहीं करवा पाए। स्थिति घरेलू हिंसा तक पहुंच गई और मामला पुलिस तक पहुंच गया। ये कोई एक घटना नहीं है, बल्कि जिला प्रोबेशन कार्यालय में घरेलू हिंसा का रोजाना एक नया मामला पहुंच रहा है। पिछले कुछ दिनों के दरम्यान इन घटनाओं में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है।
कलेक्ट्रेट स्थित जिला प्रोबेशन कार्यालय में पारिवारिक न्यायालय से पति-पत्नी के बीच आपसी विवाद के मामले भेजे जाते हैं। इसके अलावा यहां सीधे तौर पर भी महिलाएं शिकायत लेकर पहुंचती हैं। दो साल पहले तक यहां पति-पत्नी के बीच आपसी विवाद के महीने भर में बमुश्किल 10-12 मामले पहुंचते थे। लेकिन, अब हर माह लगभग तीस मामले यहां आते हैं। वर्तमान में कार्यालय में 131 मामले लंबित पड़े हुए हैं। यहां आने वाले मामलों में पति - पत्नी दोनों को बुलाकर उनकी काउंसलिंग की जाती है। एक बार में बात न बनने पर उन्हें कई-कई मौके दिए जाते हैं। तीस फीसदी मामलों में ही आपसी समझौता हो पाता है, बाकी पुलिस और न्यायालय के पास चले जाते हैं। यहां आने वाले ज्यादातर मामलों में पति - पत्नी के बीच वैचारिक मतभेद सामने आते हैं। इसके अलावा परिजन भी पति - पत्नी के बीच आपसी विवाद की वजह बनते हैं।
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चट मंगनी, पट ब्याह, झट तलाक
लड़की और लड़के के परिजनों के बीच शादी की चर्चा फरवरी माह में शुरू हुई थी। सभी की रजामंदी से मार्च में मंगनी हो गई थी और इसके बाद मई में धूमधाम से शादी हुई। लेकिन, जुलाई माह में पति - पत्नी का विवाद जिला प्रोबेशन कार्यालय पहुंच गया। पत्नी की शिकायत थी कि पति का अच्छा कारोबार है, लेकिन वो उसे खर्च के लिए एक रुपया भी नहीं देता है। बल्कि, उसे जो मायके से पैसे मिलते हैं, वो भी ले लेता है। शादी के बाद वो जितना भी पैसा मायके से अपने साथ ले गई थी, पति ने सब छीन लिया। ससुराल वालों से भी इसकी शिकायत की, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। ऐसे में साथ में गुजर बसर मुश्किल है।
शारीरिक संबंध में अरुचि बनी वजह
शादी को पांच साल गुजर चुके हैं। बच्चा अभी नहीं हुआ है। इस मामले में पति का कहना है कि शादी के बाद से अब तक पत्नी ने उसके साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाए हैं। जबकि, पत्नी ने पति के आरोप को झूठा बताया। पत्नी ने बताया कि पति हर समय शारीरिक संबंध बनाने के लिए लालायित रहता है, जबकि वो ऐसा नहीं कर सकती है। पति के साथ कई बार उसके संबंध बने हैं लेकिन, वो रोज ऐसा नहीं कर सकती है। इसे लेकर आए दिन पति उसके साथ मारपीट तक करता है। बोलचाल बिलकुल बंद है। ऐसे में वो पति के साथ रहना नहीं चाहती है। वहीं, पति ने कार्यालय में बताया कि वो पत्नी के साथ रहने को तैयार है। विवाद को यहीं खत्म करना चाहता है।
पिता से पैसे लाकर कब तक कर्ज चुकाऊं
शादी को दस साल बीत चुके हैं। दो बच्चे भी हैं। पति सरकारी नौकरी में हैं। शादी के बाद शुरुआत सालों में सब कुछ ठीक चलता रहा लेकिन, पिछले तीन-चार सालों से पति सट्टा खेलने लगे हैं, जिससे उन पर काफी कर्जा हो गया है। कर्जा उतारने के लिए कई बार पिता से लाकर पैसे दिए। पिता चार लाख से अधिक दे चुके हैं लेकिन, पति बार-बार कर्ज कर लेते हैं और दबाव बनाते हैं कि और पैसे लाओ। जबकि, पिता भी रिटायर हो चुके हैं। वे अपनी क्षमता से अधिक पैसा दे चुके हैं। ये बात कहने पर आए दिन घर में मारपीट होती है। इसका बुरा असर बच्चों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में पति से गुजारा भत्ता लेकर अलग रहना ही बेहतर है।
मानसिक प्रताड़ना भी है घरेलू हिंसा
घरेलू हिंसा केवल शारीरिक प्रताड़ना ही नहीं है, बल्कि महिला के स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन, अंग व मानसिक अपहानि भी घरेलू हिंसा के दायरे में हैं। महिला का शारीरिक दुरुपयोग, लैंगिक दुरुपयोग, मौखिक, आर्थिक तथा भावनात्मक दुरुपयोग भी घरेलू हिंसा है। इसकी शिकार महिलाएं अपनी शिकायत पुलिस, न्यायालय व जिला महिला संरक्षण अधिकारी से जिला प्रोबेशन कार्यालय में कर सकती हैं। आकस्मिक स्थिति में सूचना महिला हेल्पलाइन नंबर 181 पर भी दी जा सकती है।
पति-पत्नी के आपसी विवाद के कार्यालय में आने वाले मामलों में पहली कोशिश ये होती है कि दोनों के बीच सुलह करा दी जाए। इसके लिए दोनों को समझाया जाता है। एक बार में बात न बनने पर कई बार उनकी काउंसलिंग की जाती है। इसके बाद भी जब वे नहीं मानते तो उनके लिए पुलिस और न्यायालय के रास्ते खुले हैं।
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नंदलाल सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी
अब मुखर हैं महिलाएं
बुंदेलखंड महाविद्यालय के समाज कल्याण विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. जितेंद्र तिवारी का इस मामले में कहना है कि अब के मुकाबले पहले महिलाओं की स्थिति ज्यादा बदतर होती थी, लेकिन वे सब कुछ चुपचाप सहन करती रहती थीं। लेकिन, अब शिक्षा के प्रभाव की वजह से महिलाएं जागरूक हो गईं हैं। वे घर के भीतर या बाहर, कहीं पर भी अपने ऊपर होने वाले किसी भी गलत बर्ताव के प्रति मुखर रहती हैं। पहले महिलाओं की पहचान परिवार व पति से होती थी, लेकिन अब उनकी खुद की पहचान होती है। यही वजह है कि स्वाभिमान के विरुद्ध वे कोई भी बात बर्दाश्त नहीं करती हैं। वहीं, तमाम पुरुषों में अब भी पितृ सत्ता का भाव है। वे परिस्थितियों से समझौता नहीं कर पाते हैं। इसी का नतीजा है कि आपसी विवाद बढ़ने लगे हैं।
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