केस एक- पंजाब की मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड (जीसीए)नामक चिटफंड कंपनी ने 2014 में झांसी शहर समेत ग्रामीण इलाकों में शाखाएं खोलीं। पांच साल में रकम दोगुनी करने के लालच में निवेशकों से पैसे जमा कराए। दो साल में रकम परिपक्व होने पर उसका एक अंश वर्ष 2016 में दिया गया। इससे ग्रामीणों का विश्वास बना। भुक्तभोगियों का कहना कि अधिकांशता ग्रामीण इलाकों के लोगों ने पैसा जमा किया। वर्ष 2016 के बाद कंपनी ने भुगतान बंद कर दिया। कुछ समय बाद कंपनी ब्रांच बंद करके भाग गई। निवेशकों ने अभिकर्ता जनकल्याण समिति बनाकर रिपोर्ट दर्ज कराई। कुछ व्यक्तियों के नाम मामला दर्ज हुआ लेकिन, अब तक कार्रवाई नहीं हुई।
केस दो- इजीव चिटफंड लिमिटेड ने झांसी समेत उरई एवं ललितपुर के भी हजारों लोगों को साढ़े चार साल में पैसा दो गुना कर देने के सपने दिखाए। बड़ागांव निवासी रमेश समेत अन्य ने धन दोगुना करने का लालच में आकर अपनी पूरी मेहनत की गाढ़ी कमाई लगा दी। उसके बाद कंपनी की सभी ब्रांच अचानक बंद हो गई। पता करने पर अधिकारियों के बारे में कुछ मालूम नहीं चला। कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई लेकिन, अभी तक निवेशकों को उनकी रकम वापस नहीं मिली।
केस तीन- जीवाई गोल्ड चिट फंड कंपनी ने भी झांसी, ललितपुर, उरई से लेकर ग्वालियर तक मेें अपनी शाखाएं खोली। लोगों को अचल संपत्तियां दिखाकर पैसे जमा कराए। जब पैसे देने की बारी आई तब शाखाओं पर ताले बंद करके भाग गए। बड़ागांव बाहर निवासी राजेश बुधौलिया का कहना है कि कपंनी ने पांच साल में रकम दोगनुी करने का लालच दिया था। भुक्तभोगियों ने कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
केस चार- सहारा इंडिया की आधा दर्जन से अधिक निवेश योजनाओं में हजारों लोगों ने पैसा लगा रखा है। सहारा की सर्वाधिक लोकप्रिय 64 महीने में रकम दोगुनी करने की योजना में सबसे अधिक लोगों ने निवेश किया है। इनकी परिपक्वता अवधि पूरी होने पर भी पिछले दो साल से इनकी एक पाई भी नहीं लौटाई गई। अब परेशान होकर निवेशक पुलिस अफसरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सहारा परिवार की योजनाओं में करीब साढ़े चार सौ करोड़ रुपये निवेशकों के फंसे हुए हैं।
केस पांच- ईशान निधि लिमिटेड ने पैसा दो गुना करने का लालच देकर पांच लाख रुपये की चपत लगा दी। भुक्तभोगी नईम खान निवासी बबीना के मुताबिक सीएमडी महेश कुमार सिंह ने खुद यहां आकर लोगों को भरोसा दिलाया था लेकिन, पैसा जमा कराकर कंपनी कार्यालय में ताला बंद करके भाग गई। सोमवार को सीएमडी समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करके पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
झांसी। जल्दी से जल्दी पैसा दोगुना कराने की लालच में फंसकर झांसी के हजारों लोग अपनी मेहनत की कमाई गवां चुके हैं। छिले चार साल के दौरान यहां अलग-अलग आठ चिटफंड कंपनियां लोगों को चपत लगाकर भाग चुकी हैं। सहारा इंडिया जैसी कंपनी भी पिछले दो साल से निवेशकों को पैसा लौटाने में आनाकानी कर रही है। इन कंपनियों ने निवेशकों के करीब पांच सौ करोड़ रुपये हजम कर रखे हैं। सबसे अधिक रकम सहारा इंडिया परिवार पर है। पुलिस को मिली शिकायत के मुताबिक करीब चार सौ करोड़ रुपये निवेशकों ने इसमें जमा कर रखे हैं। अब यह पैसा वापस पाने के लिए वह सभी पुलिस के चक्कर काट रहे हैं। इसी तरह करीब सौ करोड़ की रकम लेकर चिटफंड कंपनियां फरार हो चुकीं। यह परेशान निवेशक पैसा वापस पाने के लिए अब पुलिस अफसरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
कोआपरेटिव एवं चिटफंड एक्ट का सहारा लेकर तमाम जालसाज लोग फर्जी कंपनियां बना लेते हैं। इनका मुख्य केंद्र ग्रामीण इलाकों में होता है। पैसा जमा कराने के लिए एजेंटों को चालीस प्रतिशत तक का कमीशन दिया जाता है। ऊंचे कमीशन मिलने पर एजेंट अपने संपर्कों का फायदा उठाकर लोगों के पैसे जमा करा देते हैं। अधिकांश मामलों में परिपक्वता अवधि पूरी होने से पहले ही कंपनी ताला बंद करके भाग जाती है। वहीं, एसएसपी शिवहरि मीना का कहना है जो भी मामले पुलिस ने दर्ज है, उनकी लगातार पड़ताल की जा रही है। वित्तीय मामले होने की वजह से विवेचना पूरी करने मेें समय लगता है।
सहारा इंडिया परिवार- 450 करोड़
जीसीए चिटफंड- 12 करोड़
इजीव चिटफंड लिमिटेड- 17 करोड़
जीवाई गोल्ड एवं चिटफंड कंपनी- 21 करोड़
(निवेश की यह कुल रकम जमाकर्ता एवं पुलिस के मुताबिक)
एजेंटों को दिया जाता है 25-40 प्रतिशत का कमीशन
फर्जी तरीके से बनाई गई चिटफंड कंपनियों का मुख्य ध्यान ग्रामीण इलाकों में होता है। यहां वह 25-40 प्रतिशत तक एजेंटों को कमीशन देकर भर्ती करती हैं। मोटा कमीशन मिलने के लालच में एजेंट भी बिना जांच-पड़ताल किए इन चिटफंड कंपनियों के लिए काम शुरू कर देते हैं।
हमने सहारा का नाम देखकर उसमें निवेश किया था। अब रकम परिपक्व हो जाने के बाद भी पैसा वापस नहीं किया जा रहा है। इसमें हमारी गाढ़ी कमाई की रकम लगी हुई है।
- अजय साहू
हमसे कहा गया था कि जैसे ही समय पूरा हो गया कंपनी पैसा वापस कर देगी। दो साल बीत गए लेकिन, कंपनी ने पैसा नहीं दिया। हमारी परेशानी भी कोई नहीं सुन रहा है।
- देवेंद्र
सरकार से लाइसेंस मिलने के बाद ही कंपनी पैसा जमा करा सकती है। अब अगर कंपनी पैसा नहीं दे रही है तब यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह निवेशकों को उनकी रकम लौटाए।
सूर्यप्रकाश
सुरक्षित निवेश समझकर मेहनत की कमाई इसमें निवेश की थी। अब चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सरकार को दखल देकर भुगतान कराना चाहिए।
लक्ष्मीनारायण