झांसी। पुलिस की ढिलाई के चलते हाईकोर्ट से लेकर जिला प्रशासन तक के आदेश हवा में हैं। बीच चौराहों पर खड़े अवैध खनन से भरे वाहन प्रशासन को मुंह चिढ़ाते रहते हैं। इन वाहनों को अनदेखा कर अधिकारी उसी रास्ते से गुजर जाते हैं। इससे खनन कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेश हैं कि प्रदेश में कहीं पर भी नदी का अवैध कटाव नहीं होना चाहिए। खनन कर बालू का संग्रह और अवैध बिक्री नहीं होनी चाहिए। इस आदेश के जारी होते ही जनपद की पुलिस सक्रिय हुई। अवैध खनन से भरे वाहनों को जब्त किया गया। कुछ दिन बाद पुलिस ने ढिलाई बरतनी शुरू कर दी और अब हालात पहले जैसे हो गए हैं। यह हालात तब हैं जब जिलाधिकारी कई बार अवैध खनन के वाहनों को पकड़कर कार्रवाई करवा चुके हैं।
विगत दो माह से पुलिस पूरी तरह से मूकदर्शक बनी हुई है। सुबह से शाम तक कानपुर चुंगी, लक्ष्मी ताल गेट, बड़ागांव, कोछाभांवर, हंसारी, आजाद नगर, नगरा हाट का मैदान, मुरारी नगर आदि स्थानों पर अवैध खनन से लदे वाहन खड़े रहते हैं। यही नहीं, इन स्थानों पर कई कारोबारियों ने बालू का अवैध संग्रह भी कर रखा है, जो फुटकर में बिक्री करते हैं। गुलारा चिरगांव, रामनगर और मध्यप्रदेश से सटे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कृषि में प्रयुक्त होने वाले वाहन अवैध खनन को ढोने में लगे हैं, मगर पुलिस मूकदर्शक बनी है।
कानपुर चुंगी और लक्ष्मी ताल गेट तो ऐसे स्थान हैं, जहां से अधिकांश अधिकारियों को आवागमन लगा रहता है, मगर उनको अवैध खनन से भरे वाहन नजर नहीं आते। इस संबंध में एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे का कहना है कि वैध और अवैध का निर्धारण करना खनन विभाग और जिला प्रशासन का काम है। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वह समन्वय बनाकर कार्रवाई करे।