झांसी। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में आयोजित विरोध सभा में अधिकारी व कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों पर गुस्सा जाहिर किया।
बुधवार को हाइडिल कॉलोनी स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय पर आयोजित सभा में अधिशासी अभियंता डी यादवेंदु ने कहा कि वितरण निगमों का विघटन और निजीकरण दोनों ही जनहित और कर्मचारी हित में नहीं है। उपखंड अधिकारी मुकेश चौरसिया ने कहा कि साल 2000 में राज्य विद्युत परिषद के विघटन के समय 77 करोड़ रुपये का सालाना घाटा था जो सरकार की गलत नीतियों व कुप्रबंधन के चलते अब सकल घाटा 95000 करोड़ का हो गया है। उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष रामअवतार ने कहा कि यदि सरकार निजीकरण के प्रस्ताव को वापस नहीं लेती है तो पांच अक्तूबर को सभी ऊर्जा निगमों कार्य बहिष्कार कर विरोध सभाएं करेंगे। राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के जनपद अध्यक्ष सुनील कुमार गौतम ने कहा कि बिजली को गुलाम बनाने की तैयारी चल रही है। निजीकरण के बाद लोगों के लिए जीना हराम हो जाएगा। एक अक्तूबर को केंद्रीय पदाधिकारी आगे की रणनीति बनाएंगे। अध्यक्षता सहायक अभियंता इंजीनियर शोभित दीक्षित ने की। विरोध सभा में अधिशासी अभियंता इंजी रविंद्र बाबू, सहायक अभियंता चंद्रेश तोमर, धर्मवीर, अवर अभियंता संजीव प्रभाकर, अमित सक्सेना, रोहित, दीपा, वर्षा, सुमन, सुमंत चतुर्वेदी, नंदिनी, वरुण चतुर्वेदी, रवि निरंजन व शमीम मौजूद रहे।