मंडलायुक्त अमित गुप्ता ने निर्देश दिए कि एक गांव में कम से कम तीन या चार खेत तालाब खोदे जाएं। यदि तालाब निर्माण में डिजाइन सही नहीं बनाया गया अथवा तालाब में पानी नहीं भर पाने की शिकायत मिली तो अफसरों से वसूली की जाएगी।
कैंप कार्यालय में गांवों में रोजगार के लिए अब तक किए कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि वन विभाग, मनरेगा, लघु सिंचाई विभाग और कृषि विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। जिस गांव में जिस विभाग का ज्यादा काम है, उस विभाग की जिम्मेदारी भी ज्यादा है। विभागीय अधिकारी 53 सूखा प्रभावित गांवों का भ्रमण करें और प्लान तैयार करें कि संबंधित गांवों में क्या-क्या काम कराए जा सकते हैं। वन विभाग 53 गांवों में अधिक पौधरोपण कराएं तथा चेकडैम प्राथमिकता से बनाएं। उन्होंने तालाबाें प्राथमिकता से गहरा कराएं। तालाबों की मिट्टी किसानों को दें, ताकि उन्हें इसका लाभ मिले।
उन्होंने बताया कि 11 मई को सुबह 11 बजे से विकास भवन में कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें चेकडैम तथा तालाब निर्माण की जानकारी दी जाएगी। कार्यशाला में बताया जाएगा कि कैसे कम लागत में ज्यादा पानी स्टोर करके तालाब का निर्माण किया जा सकता है।
इस मौके पर जिलाधिकारी कर्ण सिंह चौहान, उपनिदेशक सांख्यकी भोलाराम, उपनिदेशक कृषि डा. यूपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी डा. बीआर मौर्य, लघु सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता नरेंद्र चौधरी उपस्थित रहे।