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Jhansi News: नाखून की जड़ में नीलापन है तो डॉक्टर को दिखाएं

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। यदि आपको लंबे समय से खांसी है और साथ में बलगम भी आता है। सांस लेने में दिक्कत होती है। होंठ व नाखून की जड़ में नीलापन (सायनोसिस) है तो डॉक्टर को अवश्य दिखाएं। ये सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के लक्षण हैं। ध्यान रखें इसका स्थायी उपचार नहीं है। दवा या जीवनशैली में बदलाव से ही नियंत्रित किया जा सकता है।

नवंबर के तीसरे बुधवार को विश्व सीओपीडी दिवस मनाया जाता है, इसलिए 19 नवंबर को यह दिवस मनाया जा रहा है। इस बार की थीम ‘सांस फूल रही है, सीओपीडी के बारे में सोचो’ है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट एवं रेस्पिरेट्री विभागाध्यक्ष डाॅ. मधुर्मय शास्त्री ने बताया कि सीओपीडी फेफड़ों की बीमारी है, इसमें फेफड़ों में वायु का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है।
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वह बताते हैं कि इसका कोई स्थायी उपचार नहीं है। इसको श्वांस संबंधी व्यायाम, इन्हेलर अथवा वैक्सीन से नियंत्रित करते हैं। इससे वायुमार्ग साफ हो जाता है। दवाओं से फेफड़ों में सूजन कम होती है। फेफड़ों के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए एंटीबायोटिक्स दवा दी जाती है। उन्होंने बताया कि दवाओं का नियमित सेवन अथवा जीवनशैली में बदलाव न करने पर जब रोगी की हालत बिगड़ती है तो नियंत्रित करने में दिक्कत आती है। अक्सर रोगियों को ऑक्सीजन बेड या वेंटिलेटर पर उपचार करना पड़ता है।

डॉ. मधुर्मय शास्त्री ने बताया कि सीओपीडी होने की मुख्य वजह अधिक धूम्रपान करना, धूल के साथ धुआं (बायोमास ईंधन जैसे लकड़ी, गोबर, फसल अवशेष) और रसायन के अधिक संपर्क में रहने से यह दिक्कत होती है। वह बताते हैं कि जो बच्चे समय से पहले जन्म लेते हैं अथवा बचपन में लगातार श्वसन संक्रमण की चपेट में आते हैं, उनमें भी सीओपीडी होने की आशंका होती है।



0- ये होते हैं प्रमुख लक्षण



लंबे समय से खांसी के साथ बलगम आना। सांस लेने में दिक्कत होना या आवाज आना। सीने में जकड़न रहना। होंठ या नाखूनों की जड़ में नीलापन अथवा बार-बार सांस की नली में संक्रमण होना।
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क्या होती है सीओपीडी

यह फेफड़ों की बीमारियों का समूह है, जो अक्सर 45 वर्ष की आयु के बाद होता है। लंबे समय तक धूम्रपान या प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है।
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