अब तक फास्टैग की उपयोगिता सिर्फ टोल टैक्स वसूली के लिए ही मानी जाती थी, लेकिन रविवार की शाम ओरछा में हुई लूट और हत्या की वारदात के खुलासे में भी इसकी बड़ी भूमिका सामने आई है। फास्टैग की मदद से घटना के महज तीन घंटे के भीतर ही कातिल पुलिस के हत्थे चढ़ गया और लूटी गई गाड़ी भी बरामद कर ली गई है। इससे नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) भी उत्साहित है। अब वो इसका प्रचार प्रसार करने जा रहा है।
फास्टैग की व्यवस्था तो वैसे दो साल पुरानी है, परंतु 15 दिसंबर से इसे सख्ती से लागू किया गया है। सभी टोल प्लाजाओं पर बगैर फास्टैग लगी गाड़ियों के लिए सिर्फ एक लेन ही छोड़ी गई है, जिन पर गाड़ियों की लंबी-लंबी कतार लगती है। जबकि, फास्टैग लगी गाड़ियां धड़ल्ले से गुजर जाती हैं। बावजूद, विभिन्न टोल नाकों से गुजरने वाली 25 से 40 फीसदी गाड़ियों में अब तक ये नहीं लगा है। अब तक ये माना जाता था कि फास्टैग सिर्फ टोल टैक्स वसूली के लिए ही उपयोगी है। लेकिन, रविवार की शाम विद्यावती कॉलेज ऑफ फार्मेसी के चेयरमैन विद्यानिधि मिश्रा के ड्राइवर की ओरछा में हत्या कर फॉर्च्यूनर गाड़ी की लूट की घटना के खुलासे में फास्टैग की बड़ी भूमिका सामने आई है।
ग्वालियर में टोल नाके से गाड़ी के गुजरते ही विद्यानिधि के पुत्र के मोबाइल टैक्स कटने का मैसेज आया। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी और पुलिस ने तत्काल घेराबंदी कर मुरैना में गाड़ी बरामद कर ली और कातिल को भी पकड़ लिया। महज तीन घंटे में ही फास्टैग की मदद से कातिल मय गाड़ी के पकड़ा गया।
फास्टैग की इस उपयोगिता से एनएचएआई को भी बल मिला है। लोगों को फास्टैग की ये दूसरी उपयोगिता समझाना आसान हो गया है। यही वजह है कि एनएचएआई इसका प्रचार-प्रसार करने जा रहा है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक राजीव पाठक ने बताया कि कानपुर और ललितपुर रोड के चारों टोल नाकों पर अमर उजाला के 13 जनवरी के अंक में प्रकाशित खबर ‘फास्टैग से टोल कटा, मोबाइल पर मैसेज आया, पुलिस दौड़ी और लूटी गई फॉर्च्यूनर के साथ पकड़ा गया कातिल’ को होर्डिंग के जरिये प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसकी उपयोगिता समझ सकें।