झांसी। स्वच्छता सर्वेक्षण की रैकिंग में इस दफा स्वच्छ वातावरण के लिए भी अंक मिलेंगे। जिस शहर की आबो-हवा अच्छी होगी, उसे इस श्रेणी में अलग से अंक मिलेेंगे। ऐसे में अब नगर निगम को महानगर के वातावरण की भी नियमित निगरानी रखनी होगी।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण- 2022 के लिए विभिन्न वर्गों के अंक तय कर दिए हैं। इस दफा 7500 अंकों के आधार पर शहरों की रैकिंग तय होगी जबकि पिछली बार 6000 अंकों के आधार पर साफ-सुथरे शहर तय हुए थे। नए सर्वेक्षण मेंसाफ-सुथरे पर्यावरण के लिए अलग से तीन सौ अंक तय किए गए हैं। वातावरण को साफ-सुथरा रखना नगर निगम की जिम्मेदारी होगी। वातावरण से स्मोग, धूल एवं धुएं की नियमित निगरानी के साथ ही इसे नियंत्रित भी रखना होगा।
पिछली बार के स्वच्छता सर्वेक्षण में झांसी अपने वर्ग में देश भर के साफ सुथरे शहरों में 18 नंबर पर रहा। इस बार झांसी को पहले पांच स्थानों पर लाने की चुनौती है। उधर, अपर नगर आयुक्त शादाब असलम का कहना है स्वच्छता सर्वेक्षण के लिहाज से नगर निगम ने तैयारियां पहले ही शुरू कर दीं हैं। वायु गुणवत्ता की निगरानी नियमित कमांड सेंटर से की जाती है।
संवेदनशील खतरे तक पहुंच चुकी झांसी की आबोहवा
झांसी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अमूमन 51-100 के बीच रहता था लेकिन, समय के साथ यह लगातार खराब होता जा रहा है। दीपावली के पास यह 128 अंकों तक पहुंच गया था हालांकि जनवरी महीने मेें इसमें सुधार हुआ लेकिन, यह अभी भी 100 से अधिक है। वायु प्रदूषण मापने के लिहाज से इसे संवेदनशील माना जाता है।
पांच जगह लगे सेंसर, मेडिकल बाईपास का इलाका प्रदूषित
स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत वातावरण की गुणवत्ता मापने को महानगर में पांच स्थानों पर विशेष सेंसर लगे हैं। इलाइट चौराहा, बीकेडी चौराहा, मिनर्वा चौराहा, मेडिकल बाईपास तिराहा एवं मंडी बस स्टैंड के पास यह लगे हैं। इनमें मेडिकल बाईपास के आसपास का इलाका सबसे अधिक खराब पाया गया। इसी तरह सेंसर वाले इलाकों में मिनर्वा चौराहे के आसपास का वातावरण साफ-सुथरा पाया गया।