ईदुल अजहा 12 को, चांद की तस्दीक
झांसी। इस्लामी हिजरी कैलेंडर के आखिरी महीने ईदुल अजहा के चांद की शुक्रवार को तस्दीक हो गई। चांद के हिसाब से 12 अगस्त को ईदुल अजहा (बकरीद) मनाई जाएगी। देर शाम शहर के बिसाती बाजार मस्जिद में हुई रुइय्यते हेलाल कमेटी की बैठक में भी यह फैसला किया गया।
ईदुल अजहा के चांद का लोगों को बेसब्री से इंतजार था। इसीलिए शुक्रवार की शाम को तमाम लोगों ने अपने घरों की छतों से भी चांद देखने का प्रयास किया लेकिन यहां पर बदली छाई होने से चांद नजर नहीं आया। इसके बाद लोगों ने दूसरे शहरों में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से भी बात की। मगरिब की नमाज के बाद बिसाती बाजार स्थित मस्जिद में हुई रुइय्यते हेलाल कमेटी की बैठक में फैसला लिया गया कि मुंबई, झारखंड और कानपुर आदि स्थानों से चांद की तस्दीक हो गई है। इसलिए यहां पर भी 12 अगस्त को बकरीद मनाने का एलान किया गया। बैठक में अध्यक्ष मौलाना आमिल, सचिव मौलाना फखरुद्दीन, मुफ्ती साबिर कासमी मौजूद रहे। बकरीद में तीन दिनों तक जानवरों की कुर्बानियों का सिलसिला चलता है। इसे हजरत इब्राहिम की सुन्नत कहा जाता है। कुर्बानी कराना साहिबे निसाब (मालदार) मुसलमानों पर ही वाजिब है। कुर्बानी के बाद जानवरों की खालें भी गरीबों और यतीमों के लिए काम करने वाली संस्थाओं और मदरसों में दान दी जातीं हैं। उलमा ने बकरीद में साफ सफाई रखने की अपील की है। उनका कहना है कि कुर्बानी कराने के बाद गंदगी बाहर न फेंके। ऐसा कोई काम न करें जिससे की किसी दूसरे को तकलीफ हो।