बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि कर्नाटक के हुबली में ईदगाह नामक जगह है, जहां कभी तिरंगा नहीं फहराया गया था। 1994 में वह युवा मोर्चा की अध्यक्ष थी और पार्टी ने उन्हें ईदगाह पर तिरंगा फहराने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी थी। उसी साल पंद्रह अगस्त पर उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ वहां झंडा फहराया था। इस पर उनके खिलाफ केस दर्ज कर दिए गए। 2004 में यूपीए सरकार बनने के बाद उनके खिलाफ वारंट आया। वे उस समय मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं।
अटल और आडवाणी ने उनसे जमानत कराने को कहा। उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी जमानत नहीं कराईं। वे तिरंगे की शान के लिए गिरफ्तार हुईं। पूरे कर्नाटक में तिरंगे फहराए गए। कांग्रेस सरकार को घुटने टेकने पड़े और उन पर चलाया मुकदमा वापस लेना पड़ा। आगे भी जरूरत पड़ी तो तिरंगे के लिए अपना शीश भी अर्पण करने में संकोच नहीं करूंगी। यात्रा के संयोजक राजीव सिंह पारीछा ने कहा कि आजादी के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वालों का जीवन चरित्र हमारी पूंजी है।
बड़ागांव में कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष संजय दुबे व दुर्ग पर महानगर अध्यक्ष प्रदीप सरावगी ने की। इस अवसर पर चंद्रप्रकाश मिश्रा, संजीव श्रृंगीऋषि, डॉ. जगदीश सिंह चौहान, अरिदमन सिंह, हिमांशु दुबे, मोहन सिंह यादव, विनोद नायक उपस्थित थे।