झांसी। बुंदेलखंड में गौवंश की नस्ल सुधारने और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शासन ने नस्ल सुधार योजना के तहत पशुपालन विभाग को तीस लाख रुपये का बजट आवंटित किया था। अधिकारियों की लापरवाही के चलते विभाग पूरे साल में साढ़े तीन लाख रुपये खर्च कर केवल 25 उन्नत किस्म के सांड़ ही खरीद सका। शेष साढ़े छब्बीस लाख रुपये विभाग ने वापस कर दिए हैं।
सूखे की चपेट में आए बुंदेलखंड में गायों की नस्ल कमजोर होती जा रही है। इससे दुग्ध उत्पादन प्रभावित हो रहा है। शासन इस समस्या से निपटने के लिए गंभीर है, मगर स्थानीय पशुपालन विभाग के अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। सरकार ने उन्नत किस्म के सांड़ खरीदने एवं उनके रख-रखाव के लिए बुंदेलखंड के दोनों मंडलों को 30 लाख रुपये सत्र 2015-16 के लिए दिए थे।
इस धनराशि से उन्नत किस्म के सांड़ खरीद कर उनका गांवों में गायों से गर्भाधान (क्रास) कराना था। ताकि आने वाली नस्ल अच्छी हो और दुग्ध की पैदावार भी बढ़ सके। पशुपालन विभाग ने पूरे वर्ष में केवल 25 सांड़ भरारी कृषि फार्म से खरीदे। इन सांड़ों को ग्रामीणों के सुपुर्द कर दिया गया। इनकी खरीद पर कुल 3.50 लाख रुपये का खर्च आया। शेष 26.50 लाख रुपये वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर विभाग ने वापस कर दिए।
इससे जहां शासन की मंशा को झटका लगा, वहीं दुग्ध उत्पादन व नस्ल सुधार योजना भी प्रभावित हुई। अधिकारी इस बारे में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि जितनी जरूरत थी, उतने सांड़ खरीद लिए। शेष पैसा वापस कर दिया। अधिकारियों द्वारा महज 25 सांड़ खरीदने से बुंदेलखंड का दुग्ध उद्योग और आने वाली नस्लों में सुधार होने की संभावना कम हो गई है। मालूम हो जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने गत दिनों हुई बजट की समीक्षा बैठक में पशुपालन विभाग के अधिकारी से बजट वापस करने के संबंध में स्पष्टीकरण भी मांगा था।