मुंबई से लौटे प्रवासी श्रमिकों की दर्द भरी दास्तां सुनकर किसी के भी रोएं खड़े हो जाएं। बृहस्पतिवार को सिकंदरा बॉर्डर पर बसों के इंतजार में घंटों बैठे रहे श्रमिकों ने अमर उजाला को अपना दुखड़ा सुनाया। गर्भवती श्रमिक ने बताया कि पैदल चलते-चलते उसकी सांसें फूलती रहीं। कई बार तो पेट में दर्द होने लगा लेकिन मजबूरी थी तो चलती रही। इसके अलावा विकलांग पत्नी को कंधे पर उठाकर ला रहे पति को जिसने देखा, वो द्रवित हो उठा। एक श्रमिक ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान पिछले डेढ़ महीने से वह खिचड़ी ही खा रहे थे तो किसी ने बताया कि जो पाई-पाई जोड़कर रखी थी, वो भी खत्म हो गई।
मुंबई से आ रही हूं और सतना जाना है। दो महीने का बच्चा समेत 14 लोग साथ में हैं। सुबह चार बजे सिकंदरा बॉर्डर पर आ गई हूं। शाम चार बजे तक घर भिजवाने की व्यवस्था नहीं की गई। भीषण गर्मी में बच्चा बिलबिला रहा है। तीन दिन में तो यहां तक पहुंच पाई हूं। जहां काम करती थी, वहां लॉकडाउन के डेढ़ महीने तक खिचड़ी ही खाने को मिली। रास्ते में जरूर लोगों ने पूड़ी-सब्जी खिलाई। - रूबी, प्रवासी श्रमिक।
40 लोगों के जत्थे के साथ मुंबई से फतेहपुर जा रहा हूं। सिकंदरा बॉर्डर पर हम सब बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे आ गए थे, शाम चार बजे तक बस नहीं मिली। व्यवस्था देख रहे स्टाफ को लोगों की सूची चार बार दे चुका हूं। स्टाफ बार-बार लिस्ट खो देता है और फिर से मांगने लगता है। यहां पर बहुत बदइंतजामी है। सभी लोग बहुत परेशान हैं। सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। - रामदेव, प्रवासी श्रमिक।
आठ महीने की गर्भवती हूं। मुंबई से गोरखपुर जाने के लिए निकली हूं। रास्ते में चलते-चलते कई बार सांस फूली और पेट में दर्द भी हुआ। अब सिकंदरा बॉर्डर पर पति अनिल गुप्ता के साथ बैठे-बैठे 12 घंटे हो गए हैं लेकिन अब तक बस की व्यवस्था नहीं कराई गई है। भीड़भाड़ के बीच में बैठे-बैठ जी घबराने लगा है। हालांकि, स्वास्थ्य परीक्षण कराया और दवा भी ली। - अनीता देवी, प्रवासी श्रमिक।
इलाहाबाद जाने के लिए अपने 12 परिजनों के साथ मुंबई से निकला हूं। जैसे-तैसे सात हजार रुपये जुड़े थे। लॉकडाउन में कामकाज बंद होने के कारण खानपान में खत्म हो गए। मुंबई से प्रवासी श्रमिकों के लिए बसें चलने की जानकारी हुई तो यहां तक आ गए। सुबह चार बजे से सिकंदरा बॉर्डर पर बस के इंतजार में बैठा हुआ हूं। गर्मी में परेशान हूं। रास्ते में खाना तक नहीं मिला। - ललिता, प्रवासी श्रमिक।
मुंबई में मजदूरी करने अपने परिवार की गुजर बसर कर रहा था। लॉकडाउन में काम-धंधा बंद हो जाने के कारण अपने घर गाजीपुर जा रहा हूं। पत्नी ममता चौहान दिव्यांग होने की वजह से चलते-फिरने में असमर्थ हैं। ट्रक से मुंबई से मध्य प्रदेश तक आया। सिकंदरा बॉर्डर से काफी पहले ही ट्रक चालक ने उतार दिया। इसके बाद पत्नी को अपने कंधे पर बिठाकर लाया हूं। 12 घंटे से बैठा हूं, बस नहीं मिल रही। - गुड्डू, प्रवासी श्रमिक।
100 श्रमिक बीमार मिले
गैर राज्यों से लौट रहे श्रमिकों का सिकंदरा बॉर्डर पर स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। इस दौरान जुकाम, बुखार, उल्टी, डिहाईड्रेशन समेत तमाम बीमारियों से श्रमिक पीड़ित मिले। डॉक्टरों ने श्रमिकों को दवाइयां दीं।