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Jhansi News: एक ही रस्सी से फंदा लगाकर पति-पत्नी ने दी जान

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अमर उजाला ब्यूरो/संवाद
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झांसी /गुरसराय। गुरसराय के मडोरी गांव में बीमारी से तंग आकर दंपती ने एक ही रस्सी के सहारे फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। शनिवार सुबह दरवाजा तोड़ा तब दोनों एक रस्सी में बने फंदे के सहारे लटके मिले। सूचना पर पुलिस पहुंच गई। कमरे से सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। इसमें भी अपनी बीमारी की वजह से जान देने की बात कही। सुसाइड नोट में दंपती के हस्ताक्षर हैं। पुलिस भी इसे सुसाइड का मामला मान रही है।
मडोरी गांव निवासी संजय नारायण पटेल (57) पत्नी मीना देवी (55) उर्फ मीनाक्षी के साथ रहते थे। जबकि, बेटा विक्रम उर्फ विक्की कुछ दूर बने दूसरे मकान में पत्नी के साथ रहता है। संजय जीविकोपार्जन के लिए खेती-किसानी करते थे। परिजनों ने बताया मीना काफी समय से बीमार थीं। ग्वालियर में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन सेहत नहीं सुधर रही थी। संजय भी बीमार रहने लगे। अकेले होने से देखरेख करने वाला भी कोई नहीं था। दोनों ही परेशान रहते थे।
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बृहस्पतिवार रात दंपती की बेटे विक्की से बात हुई। विक्की ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 9:30 बजे तक उनका पता न चलने पर वह घर पहुंचा। आवाज देने पर भी अंदर से कोई जवाब नहीं आया। किसी तरह दरवाजा तोड़कर जब वह अंदर पहुंचा, तब वहां पहले कमरे में मां-पिता का शव एक ही रस्सी के सहारे लटका हुआ था। यह देख उसकी चीख निकल गई। चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए। उन लोगों ने तुरंत दोनों को नीचे उतार लिया और तुरंत उनको लेकर सीएचसी पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
उधर, दंपती की मौत की सूचना मिलने पर गुरसराय पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की। थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह के मुताबिक छानबीन में सुसाइड की बात सामने आई है। परिवार के लोगों ने उनके बीमार रहने की बात बताई है।
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इनसेट

तेरहवीं मत करना, बेतवा में बहा देना...
जिस कमरे में दंपती ने फंदा लगाया वहां से पुलिस ने एक सुसाइड नोट भी बरामद किया है। दावा किया जा रहा है कि यह सुसाइड नोट संजय नारायण ने अपने हाथ से लिखा है। इसमें उसके साथ ही पत्नी मीना के भी हस्ताक्षर बने हुए हैं। बेटे विक्की ने पिता की हैंडराइटिंग की तस्दीक की है। नोटबुक से फाड़े गए पन्ने पर टूटी फूटी हिंदी में लिखे इस सुसाइड नोट में भी बीमारी की वजह से दोनों के सुसाइड करने की बात कही गई। सुसाइड नोट में यह भी लिखा गया कि इसके पीछे उनके पुत्र एवं पिता का कोई दोष नहीं है। बेटा अगर उनकी बात मानें तब वह उनकी तेरहवीं न करे और उनकी लाश को बेतवा नदी में बहा दे। परिवार को प्रेम से रहने की नसीहत देते हुए आखिरी में अलविदा लिखा गया। परिजनों का कहना है कि धार्मिक वजहों से उन्होंने तेहरवीं न करने की बात कही। परिवार के लोग भी पोस्टमार्टम कराने को लेकर राजी नहीं हो रहे थे।
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