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रोक के बावजूद दुकान नामांतरण पर बरपा हंगामा

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झांसी नगर निगम सदन की बैठक में रोक के बावजूद सुभाषगंज की एक दुकान का नामांतरण होने का प्रकरण सामने आने पर पार्षदों ने जबरदस्त हंगामा किया। सवाल उठाया कि तीन-चार साल से दुकान नामांतरण पर रोक लगी हुई है, इसके बाद ये कैसे हो गया? पार्षदों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज कराने की मांग को लेकर नारेबाजी की। इस पर महापौर ने जांच के आदेश दिए हैं। बैठक में सिकमी किराएदारों का सर्वे कराने का आदेश दिया गया।
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शनिवार की दोपहर सदन की बैठक में सिकमी किराएदारों को लेकर चर्चा शुरू हुई। महापौर ने सुभाषगंज की एक दुकान का पिछले साल नामांतरण होने की जानकारी दी। यह सुनते ही कई पार्षद बिफर गए। पार्षद महेश गौतम ने कहा कि तीन चार साल से दुकान नामांतरण पर रोक लगी हुई है, फिर कैसे यह हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई नहीं हुई तो अधिकारी मिलकर नगर निगम की संपत्तियों को बेच खाएंगे। पार्षद किशोरी रायकवार ने कहा कि खून के रिश्ते के अलावा किसी अन्य के नाम दुकान का नामांतरण नहीं हो सकता है। पार्षद प्रदीप नगरिया ने कहा कि किस आधार पर दुकान का हस्तांतरण किया गया है, इसकी जांच हो और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
वहीं, पार्षद विमल किशोर ने नगर निगम की अनुमति के बिना दुकान हस्तांतरण पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तुरंत शासन को पत्र लिखा जाना चाहिए। इस पर महापौर रामतीर्थ सिंघल ने जांच के आदेश दे दिए। साथ ही सिकमी किराएदार को लेकर चर्चा हुई तो भी पार्षदों ने पहले सर्वे कराने की मांग की। जबकि, महापौर पुरानी बैठक का हवाला देते हुए सुझाव देने की बात दोहराते रहे। पार्षदों ने पूछा कि कितने सिकमी किराएदार हैं? अधिकारियों ने जब अनभिज्ञता जताई तो पार्षदों ने बिना सर्वे रिपोर्ट के प्रस्ताव पर चर्चा करने से मना कर दिया। अंत में महापौर ने नगर निगम की दुकानों का सर्वे कराने के आदेश दे दिए। साथ ही इच्छुक पार्षदों से 15 दिन में सिकमी किराएदार के प्रस्ताव पर सुझाव देने को कहा।
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बैठक में कार्यवाहक नगर आयुक्त अरुण गुप्ता, अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह, उपसभापति अनिल सोनी, पार्षद विद्या प्रकाश दुबे, बंटी राजा, विकास खत्री, कांति छत्रपाल, मुकेश सोनी, कन्हैया कपूर, रमा कुशवाहा, अंशु राय मौजूद रहीं।
इन बिंदुओं पर होगा सर्वे
- दुकान का मूल आवंटी कौन है
- वर्तमान में किसका कब्जा है
- जीएसटी की कॉपी (यदि पंजीकरण हो)
- श्रम विभाग का पंजीकरण पत्र
- संचालक का आधार व पैन कार्ड
- दुकान का क्षेत्रफल
- संचालक की फोटो
- दुकान का मूल व वर्तमान स्वरूप
- छत कच्ची है अथवा पक्की
... तो सोमवार को सीज होगी दुकान
इलाइट चौराहे के पास मूूल आवंटी द्वारा 35,000 किराए पर दूसरे को दुकान दिए जाने की शिकायत की गई। कहा गया कि नगर निगम के अधिकारियों को भी इसका हिस्सा जा रहा है। कार्यवाहक नगर आयुक्त ने कहा कि यदि ऐसा है तो सोमवार को ही दुकान सीज करा दी जाएगी। वहीं, पार्षद प्रदीप नगरिया ने कहा कि कोतवाली के पास तीन-चार दुकानों को मिलकर एक कर दिया गया है। इस पर महापौर ने जांच कराने के निर्देश दिए।
दुकानें आठ, किराया वसूली एक से!
सदन की बैठक में पार्षद सुलेमान अहमद मंसूरी ने आरोप लगाया कि नगर निगम को जानकारी ही नहीं है कि उसकी कितनी दुकानें हैं। उनाव गेट पुलिस चौकी के सामने नगर निगम की आठ दुकानें हैं, जबकि सिर्फ एक दुकान से ही किराया वसूला जा रहा है। इस पर महापौर ने क्षेत्र के टैक्स कलेक्टर को बुलाकर पूछताछ शुरू की। टैक्स कलेक्टर ने बताया कि बाकी दुकानों की रजिस्ट्री हो चुकी है। इस पर पार्षद ने प्रकरण की जांच की मांग की। महापौर ने जांच के आदेश दे दिए।
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