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ट्रायल पर आया हुकुमेंद्र और कृतिका की हत्या का केस

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झांसी। पांच महीने पहले बुंदेलखंड महाविद्यालय में हुए हत्याकांड का मुकदमा न्यायालय में ट्रायल पर आ गया है। सनसनीखेज वारदात में पुलिस ने 394 पेज का आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया है। कोर्ट कार्यवाही आगे बढ़ाते हुए आरोपी के खिलाफ आरोप तय करेगी। वहीं न्यायालय से आरोपी की जमानत याचिका खारिज की जा चुकी है।
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19 फरवरी की दोपहर अचानक बुंदेलखंड महाविद्यालय गोली की आवाज से गूंज उठा था। एमए फाइनल (मनोविज्ञान) की क्लास में मंथन सिंह सेंगर ने सहपाठी छात्र हुकुमेंद्र सिंह गुर्जर की हत्या कर दी थी। यहां से निकलकर वो गोंदू कंपाउंड के चाणक्यपुरम मुहल्ले में पहुंचा था। यहां उसने घर के बाहर दादी के साथ बैठी एमए फाइनल (इतिहास) की छात्रा कृतिका त्रिवेदी की गोली मारकर दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। यहां मंथन को मुहल्ले के लोगों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया था। तब से उसकी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे ही कट रही है। इसी बीच नवाबाद थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ 394 पेज का आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया था। आरोपी की ओर से जमानत के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था, जिसे अदालत खारिज कर चुकी है। जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) मृदुलकांत श्रीवास्तव ने बताया कि मुकदमा अब ट्रायल पर आ गया है। न्यायालय में आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए जाएंगे। इस मुकदमे में कार्यवाही जल्द आगे बढ़ेगी।
दादी को नहीं आती नींद, चीख पड़ती हैं
झांसी। हत्याकांड में जान गंवाने वाली कृतिका त्रिवेदी के पिता सुजीत तिवारी ने बताया कि हत्या के दौरान उसकी दादी उसके पास ही बैठी थीं। घटना के पांच महीने बाद भी वो हत्या का वो मंजर भूल नहीं पाईं हैं। उन्हें ढंग से नींद नहीं आती हैं। नींद आने पर आंखों के सामने वही खूनी मंजर घूमने लगता है, जिससे उनकी चीख निकल जाती है। घटना के बाद से उनकी हालत ठीक नहीं है। इसी के चलते उन्हें झांसी की जगह कानपुर में रखा गया है। झांसी आने पर उनकी हालत बिगड़ जाती है। परिवार के अन्य सदस्य भी अभी सदमे से नहीं उबर पाए हैं।
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सोते-जागते हुकुमेंद्र को ही याद करते हैं पिता
झांसी। बीकेडी में हुए गोली कांड में जान गंवाने वाले हुकुमेंद्र सिंह गुर्जर के चाचा संजय गुर्जर कॉलेज में लिपिक हैं। हुकुमेंद्र बचपन से ही अपने चाचा के साथ रहा। यहीं उसकी पढ़ाई लिखाई हुई। संजय गुर्जर ने बताया कि हुकुमेंद्र के पिता रिटायर्ड फौजी हैं। पांच महीने बाद भी सदमे से उबर नहीं पाए हैं। सोते-जागते बेटे को ही याद करते रहते हैं। संजय ने बताया कि वे लगातार मुकदमे की पैरवी कर रहे हैं। हत्यारे को मौत की सजा दिलाने उनका लक्ष्य रह गया है। हुकुमेंद्र उनका भतीजा जरूर था, लेकिन बेटे से कम नहीं था।
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