प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार ने बुंदेलखंड की पेयजल योजनाएं छह महीने के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन झांसी में ऐसा मुश्किल लगता है। दरअसल सात में दो का दो साल से बजट का इंतजार और तीन पूरी हो चुकी हैं, लेकिन अभी इनका परीक्षण ही हो रहा है। बाकी दो इसी साल मार्च में स्वीकृत हुई हैं, लेकिन काम 15 फीसदी ही पूरा हो सका है।
जनपद में पेयजल के लिए सात योजनाएं दी गईं। इसमें नदौरा ग्राम, किल्चवारा खुर्द, खलीलपुरा ग्राम, चिरगांव देहात ग्राम, रनगुवां ग्राम समूह, खड़ौरा ग्राम और मड़ौरा खुर्द ग्राम पेयजल योजना है। इनमें नदौरा, किल्चवारा और चिरगांव देहात योजनाओं पर 75 फीसदी काम हुआ और फिर बजट न होने के कारण रुक गया। बाद में जल निगम ने अपने ही मदों से इन योजनाओं का काम पूरा करवा लिया। अन्य योजनाएं बजट न मिलने से ठप हैं।
अब शासन की मंशा है कि बुंदेलखंड की सभी ग्रामीण पेयजल योजनाओं को मार्च 2018 तक पूरा कर लिया जाए, ताकि गर्मियों में जल संकट न रहे। सोमवार को मुख्य सचिव राजीव कुमार ने इस बाबत आदेश भी जारी कर दिए। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बजट बिना योजनाएं कैसे पूरी होगी? इस पर कोई चर्चा नहीं हुई। इस संबंध में जल निगम के अधिशासी अभियंता एपी यादव का दावा है कि शासन ने उन योजनाओं को पूरा करने की बात की कही हैं, जिनका 75 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। उनका यह भी कहना है कि तत्काल बजट नहीं मिला तो छह महीने के भीतर इन पेयजल योजनाओं का पूरा करना मुश्किल होगा।
लटकी योजनाएं
- 14 करोड़ की चिरगांव देहात पेयजल योजना 2014 में स्वीकृत। मार्च 2015 में 1.3 करोड़ ही मिले। 30 प्रतिशत काम पूरा। योजना के तहत नलकूप, पंप हाउस, राइजिंग मेन लाइन, वितरण पाइप लाइन, ओवर हैड टैंक, सीडब्लूआर बनना है।
- 65 करोड़ की रनगुवां ग्राम समूह पेयजल योजना 2014 में स्वीकृत। मार्च 2015 में 6.5 करोड़ मिले। 28 प्रतिशत काम पूरा। योजना के तहत नलकूप, पंप हाउस, राइजिंग मेन लाइन, वितरण पाइप लाइन, ओवर हैड टैंक, सीडब्लूआर बनना है।
- 2.78 करोड़ की खड़ौरा ग्राम पेयजल योजना मार्च 2017 में स्वीकृत। अप्रैल 2017 में 1.1 करोड़ मिले। 15 प्रतिशत काम पूरा। योजना के तहत नलकूप, पंप हाउस, राइजिंग मेन लाइन, वितरण पाइप लाइन, ओवर हैड टैंक, सीडब्लूआर बनना है।
- 2.43 करोड़ की मड़ौरा खुर्द ग्राम पेयजल योजना मार्च 2017 में स्वीकृत। अप्रैल 2017 में 97 लाख मिले। 15 प्रतिशत काम पूरा। योजना के तहत नलकूप, पंप हाउस, राइजिंग मेन लाइन, वितरण पाइप लाइन, ओवर हैड टैंक और स्वच्छ जलाशय बनना है।
पेयजल महायोजना, तारीख पर तारीख
2010 में बनी पेयजल महायोजना की लागत 264 करोड़ से बढ़कर 916 करोड़ पर पहुंच गई हैं। इसका काम तीन चरणों में पूरा होना है। पहले चरण के काम के लिए 180 करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया है। बीते 16 अक्तूबर को टेंडर डाले जाने थे, पर इसकी तारीख बढ़ाकर 27 अक्तूबर और अब फिर तारीख बढ़ाकर 15 नवंबर कर दी गई है। अब नगर निकाय चुनाव की आचार संहिता लग चुकी है। इस कारण 15 नवंबर को भी अब टेंडर मुमकिन नहीं लग रहा है।