देवोत्थान एकादशी पर घर-घर जगाए देव
महरौनी।
सनातन संस्कृति का पावन देवोत्थान एकादशी पर्व समूचे नगर और क्षेत्र में अगाध श्रद्धा भाव से मनाया गया। इस मौके पर घरों में देवों का आह्वान किया गया और परंपरागत रूप से पूजन अर्चन हुए। वहीं, नगर के प्रमुख मंदिरों में भी देवों का आह्वान कर शुभ कार्य हेतु मार्ग प्रशस्त करने की प्रार्थना की गई। विधिवत पूजन अनुष्ठान संपन्न हुउ, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
खासतौर से नगर के टीकमगढ़ रोड स्थित श्री राम जानकी मंदिर एवं प्रमुख बाजार स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर में शाम को भगवान की पूजा-अर्चना करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर में भगवान को अग्नि प्रज्वलित कर तपाया गया और गर्म कपड़ों से स्वागत किया गया ।मान्यता अनुसार भगवान के सिंहासन के ऊपर ईख के मंडप सजाकर श्रद्धालुओं द्वारा भगवान को बेर, मकोरा, ज्वार का भुट्टा, चना की भाजी, मूंगफली, मूली, उबले कद्दू के टुकड़े, शकरकंद, आंवला और विविध व्यंजनों का भोग लगाकर आह्वान किया गया। इस मौके पर बच्चों ने आतिशबाजी भी की। श्रद्धालुओं ने मन्नतें मांगी और जगत कल्याण की कामना की ।
शुभ कार्यों के लिये हुआ मार्ग प्रशस्त
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि का धार्मिक महत्व है क्योंकि इस तिथि से शुभ कार्य करने हेतु मुहूर्त शुरू हो जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि देवशयानी ग्यारस के बाद श्रीहरि जहां चार माह के लिये क्षीरसागर में शयन के लिये चले जाते हैं और इस दौरान शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। देवोत्थान एकादशी पर विष्णु जी का आह्वान किया जाता है और देवों के जागरण के बाद शुभ कार्यों का मार्ग प्रशस्त होता है। इस पर्व को श्री हरिप्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है और इस पर्व से विवाह समारोहों आदि मांगलिक कार्यक्रम भी शुरू होते हैं।
गन्ने पर छायी रही महंगाई
महरौनी। देवोत्थान एकादशी पर्व पर भगवान के पूजन में गन्ना का विशेष महत्व होता है क्योंकि गन्ना के ही मंडप बनाकर पूजन कार्य संपन्न होते हैं। मंगलवार सुबह से ही नगर में जगह जगह ग्रामीण क्षेत्रों से लोग ट्रैक्टरों में लादकर गन्ना बेचने आये। गन्ना खरीदने के लिये भारी भीड़ लगी रही लेकिन इस पर भी महंगाई छायी रही। 20 से 25 रुपये प्रति नग की दर से गन्ना बिके। गन्ने की महंगाई का कारण अल्पवर्षा और सिंचाई के पर्याप्त साधनों के अभाव में पैदावार कम होना बताया गया है। गन्ना उत्पादन करने वाले किसानों ने बताया कि बमुश्किल गन्ने की फसल की सिंचाई कर पाती हैं और क्षेत्र में गन्ना उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में बहुत कम हुआ है। इसी वजह से गन्ना मंहगा है। महंगाई के वावजूद लोगों ने रस्म अदा की।
झूमरनाथ धाम में लगा मेला
बार (ललितपुर)। प्राकृतिक सिद्ध क्षेत्र श्री झूमरनाथ धाम में प्रतिवर्ष की भांति इस साल भी देवउठनी एकादशी पर मेले का आयोजन किया गया। विशाल जनसमूह के कारण प्राकृतिक गुफा में भोले भंडारी के दर्शन करने में श्रद्धालुओं को लंबी-लंबी कतारे लगी रहीं। मेले में पुलिस प्रशासन व मेला समिति की व्यवस्था भी चौकस रही। गौरतलब है कि झुमरनाथ धाम में मेले का आयोजन कई वर्षों से लगातार होता है। पुजारी सोनू के अनुसार शिवरात्रि से होलिका दहन तक भी इसी तरह के मेले का आयोजन कई वर्षों से चला आ रहा है, परन्तु कार्तिक मास धार्मिक मान्यता के अनुसार काफी पवित्र मास माना जाता है।