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हरित पट्टी, पार्क की जमीन पर खड़े नहीं कर सकेंगे आलीशान बंगले

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झांसी। अब जमीनों के भू-उपयोग को छिपाकर बैनामा नहीं होगा। हरियाली और पर्यावरण को बचाने के लिए एनजीटी (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण) के आदेश पर शासन ने सभी विकास प्राधिकरणों विशेष निर्देश जारी किए हैं। अब झांसी विकास प्राधिकरण को महायोजना में प्रस्तावित भू-उपयोग को जेडीए की वेबसाइट और जिले के स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन कार्यालय को मुहैया कराना होगा। इसके अलावा जमीनों के बैनामों में भी जमीन के भू-उपयोग का खुलासा करना अनिवार्य किया गया है।
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महानगर को पार्क, खुले स्थल, हरित पट्टी, खेल का मैदान व रिहाइश सहित कई भागों में बांटा गया है। जिसमें रिहाइश इलाके को छोड़ कर अन्य स्थलों निर्माण कार्य को नहीं कराया जा सकता है। लेकिन शहर के भूमाफियाओं द्वारा किसानों से जमीनों की खरीदारी कर प्लॉटों, मकानों व कॉलोनियों का निर्माण कराकर शहर वासियों को मनमाने दामों पर बेच दिया जाता है। बैनामों में भू-उपयोग की उपयोगिता नहीं होने के कारण रजिस्ट्री भी बड़े आसानी से हो जाती है।
जिसका खमियाजा मकानों, फ्लैटों व प्लॉटों को खरीदने वालों को भुगतना पड़ता है। निर्माण होने की दशा में विभाग द्वारा भी कार्रवाई करने में आनाकानी करता है। इन जगहों पर नक्शा व लेआउट स्वीकृत भी नहीं किया जा सकता है। ऐसे में झांसी विकास प्राधिकरण के अधिकारी भी क्या करें, क्या न करें की स्थिति में रहते हैं। लेकिन एनजीटी द्वारा जारी किए गए निर्देश के अनुसार महायोजना में प्रस्तावित पार्क, खुले स्थल, हरित पट्टी, खेल मैदान को जेडीए की वेबसाइट पर अपलोड कर सार्वजनिक करने के साथ ही स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग को मुहैया करने के निर्देश जारी किया गया है। जिससे की बैनामा होने की दशा में तुरंत ही जमीन का भू-उपयोग को देखा जा सके।
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इस संबंध में झांसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित ने बताया कि महायोजना में प्रस्तावित भू-उपयोग को जेडीए की वेबसाइट पर उपलोड कर दिया गया है। स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग को भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
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