जनपद में चिकित्सीय गर्भ समापन (एमटीपी) का रजिस्ट्रेशन कराने वाले नर्सिंग होम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। नियमानुसार अस्पतालों को प्रत्येक माह सीएमओ कार्यालय में गर्भपात की रिपोर्ट भेजनी चाहिए, लेकिन आधे से अधिक नर्सिंग होम ऐसा नहीं कर रहे हैं। स्वास्थ्य महकमे द्वारा कार्रवाई न करने से अस्पतालों के हौसले बुलंद हैं।
जनपद में सैकड़ों निजी अस्पताल संचालित हैं, जिनमें 36 अस्पतालों ने एमपीटी का रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके तहत इन अस्पतालों को 12 व 20 हफ्ते तक के गर्भपात की अनुमति दी गई है। नियमों के अनुसार इन सभी अस्पतालों को हर माह गर्भपात की रिपोर्ट सीएमओ दफ्तर भेजनी होती है, जिसे विभाग शासन को भेजता है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के ढुलमुल रवैये के चलते अस्पताल ऐसा नहीं कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़े भी इस बात का खुलासा कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार मई 2015 में 36 अस्पतालों में मात्र 11 ने एमटीपी रिपोर्ट भेजी है। जबकि अप्रैल में सिर्फ सात अस्पतालों ने ही रिपोर्ट भेजी है। इससे पूर्व तो संख्या और भी कम है। अस्पतालों द्वारा रिपोर्ट न भेजने से कुल गर्भपात की सही संख्या शासन के पास नहीं पहुंच पा रही है।
...तो भेजें निल की रिपोर्ट
झांसी। एमटीपी का रजिस्ट्रेशन कराने वाले अस्पताल यदि माह में एक भी गर्भपात नहीं कराते हैं, तो निल की रिपोर्ट भेजने का प्रावधान है। सीएमओ कार्यालय को कुछ अस्पतालों ने निल की रिपोर्ट उपलब्ध कराई है। इसलिए जो अस्पताल निल की रिपोर्ट नहीं भेज रहे हैं, वो भी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
मार्च में नहीं हो सकी बैठक
झांसी। सीएमओ की अध्यक्षता में हर तीन माह में एमटीपी की जिला स्तरीय कमेटी की बैठक होती है, जिसमें एमटीपी का रजिस्ट्रेशन कराने वाले नर्सिंग होम के प्रतिनिधियों को भी बुलाया जाता है। इस दौरान कितनों ने रिपोर्ट भेजी और कितनों ने नहीं इसकी समीक्षा होती है। मार्च में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया चलने से यह बैठक नहीं हो सकी, इस कारण समीक्षा भी नहीं हो पाई। अब जून में इसकी बैठक होगी।