झांसी। पाकिस्तान में 13 साल जेल काटकर अमृतसर आए ललितपुर के सतवांसा गांव के सोनू सिंह को घर वापस लाने के लिए जिला प्रशासन अभी भी कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। एक महीने से अधिक समय बाद भी उसे अमृतसर से ललितपुर नहीं लाया जा सका है। अब भी अधिकारी कागजों के फेर में उलझे हैं। उधर, सोनू के घर वाले उसके इंतजार में छटपटा रहे हैं। जिला प्रशासन से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर अमर उजाला ने सोनू के मामले में गृह सचिव तरुण गाबा से फोन पर बात की। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे खुद मामले की जानकारी लेकर सब कुछ प्राथमिकता पर कराएंगे। जल्द से जल्द सोनू अपने घर पहुंचेगा।
पाकिस्तान की तमाम जेलों में 13 वर्ष तक यातनाएं झेल कर जब सोनू सिंह अमृतसर आया तो उसे व उसके परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं था। उन्हें लगा कि परेशानी का समय खत्म हुआ अब वो खुशी-खुशी परिवार के साथ अपने गांव में रहेगा। लेकिन ललितपुर जिला प्रशासन का कथित सरकारी ढर्रा उनकी खुशियों में बाधा बना हुआ है। अमृतसर के उपायुक्त गुरप्रीत सिंह खैरा से पूरी प्रक्रिया समझने और प्रकाशित करने के बाद भी जिला प्रशासन ने सोनू को घर वापस लाने में विशेष पहल नहीं की है।
अभी भी कागज तैयार करने और गृह विभाग से अनुमति मांगने की बात कही जा रही है। बेटे के लिए छटपटाते सोनू के परिजनों की दयनीय स्थिति और जिला प्रशासन के ढर्रे को अमर उजाला ने गृह सचिव तरुण गाबा को फोन पर बताया। उन्होंने मामले में व्यक्त्गित स्तर पर जानकारी लेने और सोनू की जल्द घर वापसी सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया है।
‘भारतीय कानून के तहत तो सोनू ने कोई अपराध किया ही नहीं है। इसलिए उसे घर भेजने से पहले बहुत औपचारिकताओं की जरूरत नहीं है। फिर भी, अगर पंजाब प्रशासन का कोई नियम है तो तत्काल सारी बाधाएं दूर की जाएंगी। मैं खुद पूरे मामले की जानकारी करता हूं। सोनू जल्द से जल्द घर आएगा’
तरुण गाबा, सचिव गृह विभाग लखनऊ
मिनटों का काम महीने में नहीं हुआ
ऑफिशियल ईमेल आईडी से मेल कर आलाधिकारी तमाम बड़े से बड़े मामले में एक दूसरे को अवगत कराते हैं। इसी माध्यम से मार्गदर्शन और अनुमति भी ली जाती है। विभागीय कर्मी को ललितपुर से लखनऊ भेज कर भी अनुमति हासिल की जा सकती थी। ललितपुर प्रशासन अगर मानवीय आधार पर पहल करता और तथ्यों के आधार पर गृह विभाग के अधिकारियों से अनुरोध करता तो अनुमति मिल गई होती। लेकिन अव्वल तो जिला प्रशासन ने पहल ही नहीं की, अब देरी से कर भी रहा है तो रवैया बहुत ढुलमुल है। प्रशासन के सूत्र खुद मान रहे हैं कि ढंग से मामले की पैरवी नहीं हुई।
डीएम ललितपुर ने तो बात भी करना उचित नहीं समझा
बृहस्पतिवार को डीएम अन्नावि दिनेश कुमार ने बताया था कि सोनू को लाने के लिए हर हाल में शुक्रवार तक अनुमति मिल जाएगी। इसके बाद यहां से टीम उसे लाने के लिए अमृतसर भेज दी जाएगी। लेकिन अनुमति व अन्य तैयारियों की जानकारी के लिए उन्हें शुक्रवार को सीयूजी नंबर पर दो बार फोन किया गया। एक बार उनके ओएसडी ने बताया कि वह बैठक में व्यस्त हैं, दूसरी बार कहा कि ‘साहब से आपकी बात कराता हूं’। इसके बाद खबर लिखे जाने तक जिलाधिकारी ललितपुर का कोई आधिकारिक पक्ष नहीं आया। फिर गृह सचिव से संपर्क किया गया।
जिला स्तर पर सोनू की घर वापसी के लिए आवश्यक कागज तैयार कर लिए गए हैं। सोनू के रिश्तेदार गंधर्व सिंह के पत्राचार पर अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र लिखकर भेजा गया है, एक दो दिन में शासन स्तर से अनुमति मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद नामित अधिकारी को सोनू को लेने के लिए अमृतसर भेजा जाएगा।
अनिल कुमार मिश्रा, अपर जिलाधिकारी, ललितपुर।