झांसी। इस बार 28 मार्च (रविवार) को पहली बार अनूठा संयोग बनने जा रहा हैं। रविवार की रात जहां हिंदू समुदाय के लोग होलिका दहन करेंगे, वहीं मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा शब - ए - बरात का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन जगह - जगह होली जलाई जाएगी और मस्जिद, मजार व कब्रिस्तानों में इबादत होगी। मोमबत्ती व झालरों की रोशनी बिखेरी जाएगी।
होली हिंदू समुदाय के प्रमुख पर्वों में से एक है। इसका सबसे बड़ा विधान होलिका दहन माना जाता है। जो अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। होलिका दहन अबकी बार 28 मार्च की रात को होगा। वहीं, शब - ए - बरात मुस्लिम समुदाय के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इसके पंद्रह दिन बाद रमजान का पवित्र माह शुरू होता है। शब - ए - बरात पर मुस्लिम धर्मावलंबी रात में कब्रिस्तानों में जाकर अपने पूर्वजों के गुनाहों को माफ करने की पाक परवरदिगार से दुआ करते हैं। साथ ही कब्रिस्तानों में अगरबत्ती जलाकर सुगंध बिखेरी जाती है। मोमबत्तियों और झालरों की रोशनी से कब्रिस्तानों में रोशनी बिखेरी जाती है। इसके अलावा मजारों में फातिहा दी जाती है तथा मस्जिदों में सारी रात कुरान की तिलावत की जाती है। जबकि, इसके अगले दिन मुस्लिम रोजा रखते हैं। शब - ए - बरात पर रात भर महानगर में मुस्लिमों की चहल - पहल रहती है। पहली बार होलिका दहन और शब- ए- बरात एक ही रात मनाए जाएंगे। जबकि, इसके अगले दिन एक ओर होली खेली जाएगी और दूसरी ओर मुस्लिम परंपरानुसार मुस्लिम एक दिन का रोजा रखेंगे।
28 मार्च की रात झांसी की गंगा-जमुनी तहजीब के दर्शन होंगे। हिंदू होलिका दहन करेंगे और मुस्लिम शब - ए - बरात का त्योहार मनाएंगे। सभी अपनी-अपनी परंपराओं का आपसी सौहार्द के साथ निर्वहन करेंगे। इससे पहले भी गणेश प्रतिमाओं व ताजियों का विसर्जन एक ही दिन सौहार्द के साथ हो चुका है।
- आचार्य हरिओम पाठक, महानगर धर्माचार्य
शब - ए - बरात अपने पुरखों को याद करने का खास पर्व होता है। इस बार ये पर्व 28 मार्च को है। इसके अगले दिन परंपरानुसार एक दिन का रोजा रखा जाता है। दोनों ही समुदाय आपसी सौहार्द के साथ अपने-अपने त्योहार पूरी शिद्दत के साथ मनाएंगे।
- मुफ्ती साबिर कास्मी