झांसी। बुंदेलखंड में झांसी के होली महोत्सव की अपनी एक अलग पहचान रही है। मंदिरों में होली की पड़वा से शुरू होने वाले फागोत्सव रंग पंचमी तक चलते हैं। इनमें होली के रंग के साथ बुंदेली राग रस लोगों को हास परिहास और श्रृंगार से सराबोर कर देते हैं। राधा और श्याम की होली की ठिठोली का चित्र खींचने वाले बुंदेली होली के रसिया जब मंदिरों में गाए जाते हैं तो भक्त रंग गुलाल में सराबोर होकर नाचने लगते हैं। कई मंदिरों में फूलों की होली खेली जाती है। बुंदेलखंड में गाये जाने वाले प्रसिद्ध होली का रसिया, तोरी फाग में लग जाए आग श्याम मोरी चूनर रंग से भिड़ गई, मंदिरों में खूब गाया जाता है। मंदिरों में जहां होली के रसिया गाए जाते हैं तो सड़कों और चौराहों पर फगुआरे ढोल नगड़िया पर चौकड़ियां व होली के राई गीत गाकर नृत्य करते हैं।
मंदिरों में पड़वा से रंग पंचमी तक चलते हैं फागोत्सव
नगर के श्रीकृष्ण मंदिरों में होली जमकर खेली जाती है। श्री कुंज बिहारी मंदिर में होलिका दहन के बाद दस मार्च को पड़वा वाले रोज चंदन और गुलाल की होली भक्त अपने आराध्य श्री कुंज बिहारी सरकार के साथ खेलेंगे। सभी एक दूसरे को चंदन का तिलक लगाएंगे। मंदिर में फूलों की होली भी खेली जाएगी और महानगर के प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायक होली के रसिया सुनाएंगे। बड़ा बाजार स्थित मुरली मनोहर मंदिर में भी 13 मार्च को रंगपंचमी के ठीक एक दिन पहले फूलों की होली खेली जाएगी। इस प्रकार से इस्कॉन मंदिर में भी दस मार्च को फूलों की होली खेली जाएगी। मंदिरों में होली की तैयारियां पूरी कर लीं गईं हैं।
झांसी का कुंज विहारी का मंदिर सखी संप्रदाय के संतों का आश्रम है, यहां शुरू से ही भगवान श्रीकृष्ण को नायक मानकर राधारानी क ी सखियों के रूप में फूलों की होली खेली जाती है। बाहर से भी सैकड़ों भक्त इसमें हिस्सा लेने झांसी आते हैं।
महंत कुंज विहारी मंदिर
इस्कान मंदिर में चैतन्य महाप्रभु की जयंती पर दस मार्च को फागोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसमें सभी भक्त प्रभु जी के साथ फूलों की होली खेलेंगे। यह आयोजन प्रतिवर्ष होता है।
बृजभूमि दास
इस्कॉन मंदिर झांसी
झांसी के मंदिरों में होने वाले फागोत्सव में न केवल महानगर के लोग बल्कि आसपास के रक्सा, कारारी, भगवंतपुरा के लोग भी होली के रसिया सुनने के लिए आते हैं।
कल्लू पंडा जी रक्सा
झांसी के मंदिरों में जो फागोत्सव मनाए जाते हैं, उसमें होने वाली बुंदेली होली के रसिया की महिफलें यादगार होती हैं। शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी मंदिरों पर पहुंचकर अपने गायन की हाजिरी लगाते हैं।
दीपू महाराज
कुंजबिहारी मंदिर
झांसी का कुंजबिहारी मंदिर यहां रंग पंचनमी पर भव्य फूलों की होली का आयोजन होता है। अमर उजाला