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हिंदू, मुस्लिम में फर्क नहीं, सब परवरदिगार के बंदे

Sun, 29 Apr 2018 01:43 AM IST
amarujala
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karykarm, jhansi news - फोटो : amar ujala, jhansi news
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हर मुस्लिम को अपने दीन को समझना चाहिए। दीनी तालीम पर अमल करना चाहिए। देखते ही देखते जिंदगी बदल जाएगी। यह तकरीर शनिवार से शुरू हुए दो दिवसीय इज्तिमा में उलेमाओं ने दी। उन्होंने इस्लामी तालीम पर जोर दिया। साथ ही सौहार्द का संदेश देते हुए कहा कि हिंदू, मुस्लिम में भेद नहीं करना चाहिए। सभी पाक परवरदिगार के बंदे हैं।
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पठौरिया स्थित बड़ा ईदगाह फज्र (सुबह) की नमाज के समय तक खचाखच भर गया था। देश के विभिन्न हिस्सों से आए उलेमा और अकीदतमंद वहां मौजूद थे। नमाज के साथ इज्तिमा का आगाज हुआ। शुरूआत में मौलाना उमर ने कहा कि पूरी कायनात अल्लाह का कुनबा है। अपने आमाल से किसी को तकलीफ न पहुंचाएं। जिंदगी जीने का वो तरीका अपनाओ जो हर किसी को राहत पहुंचाए। अपने दिमाग से यह बात निकाल दो कि कौन हिंदू है और कौन मुसलमान, क्योंकि अल्लाह की इस कायनात में सभी उसी के बंदे हैं। किसी की गरीबी जिल्लत और न ही किसी की अमीरी इज्जत का विषय है।
मौलाना शाहिद ने कहा कि दीन पर अमल न करने वालों की नसीहत को कोई तवज्जो नहीं देता। अल्लाह के बंदों को बुरे काम से दूर रहना चाहिए, बुरी बात भी नहीं करनी चाहिए। दीनी उसूलों पर चलें। नबी-ए-करीम की सीरत पर अमल करें। अगर किसी शख्स में 99 बुराइयां हैं और महज एक अच्छाई है, तो उस अच्छाई को देखो।
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मौलाना अब्दुल्ला ने कहा कि नेकी करो, पर दिखावा नहीं। उन्होंने कुरान और सुन्नत के मुताबिक जिंदगी जीने की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि यदि आपको अपनी आखिरत संभालने की फिक्र आ जाए तो समझो कि आपने कुछ सीखा है।
मुफ्ती साबिर अंसारी ने कहा कि खुदा ने इंसान को सैर तफरी के लिए नहीं बल्कि अपनी बंदगी के लिए भेजा है और इसका पूरा हिसाब होगा। अल्लाह ताला ने दो नियामत दी हैं, एक तो अपना बंदा बनाया है और दूसरा मोहम्मद साहब का उम्मती।
हाफिज मसकूद ने कुरान-ए-करीम की बातों पर रोशनी डालते हुए कहा कि वह लोग कामयाब है जिन्होंने नमाज पढ़ी, हज किया, जकात दी। हज़रत मोहम्मद साहब ने फरमाया है कि मुसलमान वह जिसकी जुबान व हाथ से दूसरा इंसान महफूज रहे। अल्लाह ताला सदका (दान) को पसंद फरमाता है।

 हाजी एजाज ने कुरान और हदीस की रोशनी में जिंदगी गुजारने का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि अल्लाह पाक हमारा मालिक है और हम सब उसके मोहताज हैं।
 इस मौके पर हाफिज मोहम्मद फैसल, मोहम्मद मिस्वा, हाफिज मोहम्मद नदीम, हाफिज मोहम्मद अजहर, मुफ्ती मोहम्मद अफ्फान असअदी, हाजी अब्दुल अजीज, डा. जहीर, राशिदउल्ला, अल्ताफ, ताविश, ललितपुर से रईस खान, फारूख खान, मोहम्मद हनीफ, मोहम्मद आजाद व अबरार मास्टर मौजूद रहे।

बारिश में जारी रही तकरीर
इज्तिमा के पहले दिन दोपहर में अचानक मौसम खराब हो गया। तेज आंधी और बारिश से मैदान में लगे पंडाल उड़ गए। इस दौरान उलेमा तकरीर कर रहे थे। उन्होंने अपनी तकरीर बंद नहीं की और अकीदतमंद भी जमे रहे। व्यवस्थाओं में लगे लोगों ने बाहर रखे सामान को समेटकर पंडालों में रखा और बाद में पंडाल दुरुस्त कर लिया गया।

मुस्तैद रही पुलिस
इज्तिमा के चलते ईदगाह से लेकर शहर में प्रवेश करने वाले स्थानों पर पुलिस मुस्तैद रही। ईदगाह स्थल पर कोतवाल उमेश चंद्र त्रिपाठी अपनी टीम के साथ डटे रहे। इसके अलावा पुलिस के साथ इज्तिमा की तरफ से 22 वालंटियर टीमें व्यवस्थाओं में जुटी रहीं। शहर के सभी चौराहों व सड़कों पर लोगों को पानी व शर्बत भी वितरित हुआ।

डाक्टरों टीम रही तैनात
इज्तिमा पर भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की तरफ से मेडिकल इंतजाम भी पुख्ता रहे। यहां पर डा. सूर्यकांत गुप्ता, सुरेंद्र कुमार, राजा प्रताप सिंह, रेनू, डा. इमरान सिद्दीकी, आबिद खान, डा. इलाही, डा. अबरार अंसारी व डा. मोहसिन खान मेडिकल कैंप में मौजूद रहे। तबियत बिगड़ने पर लोगों का उपचार किया गया।

नौ जिले के लोग संभाले हैं कमान
इज्तिमा पूरा कराने के लिए झांसी के साथ जालौन, कानपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा, ललितपुर, उन्नाव, कर्वी के लोग कमान संभाले हैं। सभी-अपनी अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में जुटे हुए हैं। इन जिलों के लोगों ने एक दिन पहले ही ईदगाह में डेरा जमा लिया था।
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