जिले की सूखाग्रस्त धरती पर कर्ज की फसल खूब लहलहा रही है। प्रदेश सरकार की ऋण माफी योजना भी इलाके को इस बदहाली से नहीं उबार पाई है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जनपद के किसानों पर विभिन्न बैंकों का 20.53 अरब रुपये बकाया है। इनमें से 1.46 अरब रुपये तो बट्टे खाते (एनपीए) में पड़े हुए हैं।
प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के बाद भाजपा सरकार फसल ऋण माफी योजना लेकर आई थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि यह योजना किसानों को कर्ज के दलदल से बाहर निकाल देगी। योजना के तहत जिले के अड़तालीस हजार किसानों का 2.71 अरब रुपये का कर्ज माफ किया गया था। इससे दैवी आपदाग्रस्त जिले के किसानों का कर्ज बोझ कम तो हुआ, परंतु वह इस मकड़जाल से पूरी तरह से नहीं उबर पाए। एक लाख साठ हजार किसानों पर अब भी अलग अलग बैंकों का 20 अरब 53 करोड़ 68 लाख 40 हजार रुपये का कर्ज बकाया है। यह ऋण उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और ट्रैक्टर व अन्य कृषि उपकरणों की खरीद के लिए लिया था, जिसकी वह अदायगी नहीं कर सके। इनमें से 1.46 अरब रुपये तो बैंकों के एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट) में चले गए हैं।
किसानों की हालत पतली है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस साल ही सरकार ने जिले के 381 गांवों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इन गांवों में सरकार ग्रामीणों की रोटी का बंदोबस्त करने के लिए अगले माह से आटा, दाल, नमक, तेल, घी और दूध बांटने जा रही है। ऐसे में आपदाग्रस्त किसानों से कर्ज की वापसी की उम्मीद बेमानी ही साबित होगी।
किसानों से अदायगी का आग्रह
बकायेदार किसानों से कर्ज की अदायगी का आग्रह किया जा रहा है। इसके लिए पंद्रह मई तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत यदि किसान मूल धन की जगह सिर्फ ब्याज भी जमा कर देते हैं, तो बैंक उनकी किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ा देगा। इसके अलावा जितने किसानों का ऋण माफ होना था, वो हो गया। अब किसान इंतजार न करें और उक्त योजना का लाभ लें। इसी में भलाई है। बैंकों को लौटाई गई रकम उन्हीं के काम आएगी।
- आरसीपी एक्सेना, मंडल प्रमुख - पंजाब नेशन बैंक
पूरा ऋण हो माफ, नई हो शुरुआत
किसानों की ऋण माफी को पचास हजार और एक लाख के दायरे में नहीं बांधना चाहिए। बल्कि, पांच एकड़ से नीचे वाले सभी लघु और सीमांत किसानों का पूरा ऋण माफ कर देना चाहिए। वरना होता है यह कि किसान ऋण माफी होने के बाद भी कर्जदार बने रहते हैं। उनका खाता एनपीए में डाल दिया जाता है। बैंक से नोटिस जाता है, तो वह साहूकार की शरण लेते हैं। साहूकार से ऊंचे ब्याज पर ऋण लेकर बैंक को चुकाते हैं। फिर बैंक के आगे हाथ फैलाते हैं। यह चक्र चलता रहता है। इसके अलावा कृषि ऋण को एनपीए में भी नहीं ले जाना चाहिए।
- निरंजन धुलेकर, रिटायर्ड बैंक अधिकारी
बड़े किसानों का भी ऋण हो माफ
बुंदेलखंड के पांच एकड़ से अधिक जमीन वाले वृहद किसान प्रदेश के अन्य हिस्सों के छोटे किसानों से भी बदतर स्थिति में है। लगातार दैवी आपदा और पानी की कमी की वजह से पैदावार लगातार घट रही है। ऐसे में क्षेत्र के वृहद किसानों का भी ऋण माफ किया जाना चाहिए और उन्हें राहत राशि भी मिलनी चाहिए। जबकि, सरकार केवल लघु और सीमांत किसानों को ही लाभ दे रही है। इसके अलावा किसान पर जितना भी कर्ज है, वो पूरा माफ करना चाहिए। तभी सही मायने में किसान ऋण माफी योजना से लाभान्वित होंगे।
- शिवनारायण सिंह परिहार, बुंदेलखंड अध्यक्ष - भारतीय किसान यूनियन भानु