झांसी। हिंदी साहित्य भारती की दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय बैठक का रविवार को दीक्षांत समारोह हुआ, जिसमें केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब हिंदी गंगा की तरह पूरे विश्व में धारा बनकर बहेगी। इस दौरान साहित्यिक सेवाओं के लिए विभूतियों का सम्मान हुआ। हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का संकल्प दोहराया गया।
दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि इस आयोजन के जरिये हिंदी की विभूतियों को एक मंच पर लाने का काम किया गया है। यह क्रम सतत रूप से चलता रहना चाहिए। इस दौरान हिंदी साहित्य भारती के केंद्रीय उपाध्यक्ष डा. बुद्धिनाथ मिश्र, डा. नरेश मिश्र व डा. करुणाशंकर उपाध्याय को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। इस दौरान सर्वसम्मति से भारत सरकार से मांग की गई कि संविधान में संशोधन कर हिंदी को राजभाषा के स्थान पर राष्ट्रभाषा बनाया जाए।
आयोजन के विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल डा. शेखर दत्त, गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डा. विष्णु पंडया, कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. सुशील चतुर्वेदी, हिंदी साहित्य भारती के मॉरीशस के अध्यक्ष डा. हेमराज सुंदर व संयुक्त अरब अमीरात के अध्यक्ष इं. भूपेंद्र कुमार रहे। अध्यक्षता संस्था के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व शिक्षा मंत्री रवींद्र शुक्ल ने की।
इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष पवन गौतम, विधायक जवाहर राजपूत समेत डा. धन्नूलाल गौतम, जमुना कुशवाहा, प्रदीप सरावगी, डा. नीति शास्त्री, नीरज सिंह, प्रो. मुन्ना तिवारी आदि मौजूद रहे। संचालन कवयित्री डा. कीर्ति काले ने किया। ध्येय गीत डा. चितरंजन ने प्रस्तुत किया। आभार निशांत रविंद्र शुक्ल ने जताया।