झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हेपेटाइटिस बी की दवा अब निशुल्क मिलने लगी है। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत मेडिकल कॉलेज को ट्रीटमेंट सेंटर बनाया है, जो कि मेडिसिन विभाग द्वारा संचालित है।
हेपेटाइटिस बी एक संक्रमणकारी रोग है, जो वायरस से होता है और रक्त द्वारा फैलता है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में लगभग चार करोड़ आबादी हेपेटाइटिस बी से ग्रसित है। इससे हर साल डेढ़ लाख मरीजों की मौत हो जाती है। हेपेटाइटिस बी की रोकथाम के लिए इसकी वैक्सीन बहुत कारगर है। इसके बावजूद भारत में हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसकी रोकथाम के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत मेडिकल कॉलेज को ट्रीटमेंट सेंटर बनाया है। इसका संचालन मेडिसिन विभाग कर रहा है।
ट्रीटमेंट सेंटर के नोडल अधिकारी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. रामबाबू और कंसल्टेंट इंचार्ज डॉ. जकी सिद्दीकी हैं। डॉ. रामबाबू ने बताया कि हेपेटाइटिस बी की प्रमुख दवाओं जैसे की टीनो फोविर व इंटिकावीर जैसी अहम दवा मेडिसिन विभाग में उपलब्ध है। विभाग द्वारा इन दवाओं का कंसल्टेंट की देखरेख में ओपीडी नंबर 138 से निशुल्क वितरण शुरू कर दिया गया है। ऐसे मरीज जिन्हें यह दवा खरीदनी पड़ती है, वह सभी मेडिसिन विभाग की ओपीडी से प्राप्त कर सरकार द्वारा संचालित योजना का लाभ अवश्य उठाएं।
ये हैं बीमारी के कारण
- संक्रमित रक्त के संपर्क में आने से।
- बिना स्टरलाइज की गई सुई के उपयोग से।
- दूसरे के लिए इस्तेमाल या दोबारा उपयोग में ली गई सुई के इस्तेमाल से।
- जिसे हेपेटाइटिस बी का संक्रमण हो, उसके साथ असुरक्षित संबंध रखने से।
- संक्रमण वाली माता से उसके नवजात शिशु में गर्भावस्था या प्रसूति के दौरान।