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सावधान! गूगल पर हेल्प ढूंढना फंसा न दे हैकरों के जाल में

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झांसी। यदि आप बैंक या किसी अन्य कंपनी का हेल्पलाइन नंबर गूगल से खोजकर मदद लेने जा रहे हैं तो सतर्क रहें। कहीं ऐसा न हो कि आपके खाते से रकम उड़ जाए। साइबर अपराधियों ने कई नामी कंपनियों जैसी हुबहू दिखने वाली कई फर्जी कंपनियों के हेल्पलाइन नंबर गूगल पर डाल रखे हैं। इन नंबरों का प्रयोग करने के चक्कर में महानगर में 17 दिनों के अंदर बारह से अधिक लोग अपने खातों से रकम गवां चुके हैं। इन मामलोें में साइबर सेल व संबंधित थाना पुलिस जांच कर रही है।
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थाना कोतवाली के ओरछा गेट अंदर निवासी सलीम ने चार दिन पहले एक रिश्तेदार के खाते में दस हजार रुपये ट्रांसफर किए। लेकिन, देरी से रकम पहुंचने के कारण उन्होंने संबंधित बैंक का गूगल से हेल्पलाइन नंबर डालकर जानकारी ली। नंबर फर्जी होने के कारण वह कॉल सीध साइबर अपराधियों के पास पहुंच गई। जहां साइबर अपराधियों ने खाते की जानकारी लेेकर छह हजार रुपये उड़ा दिए। मेसेज आने के बाद उनको पता चला। उन्होेंने साइबर थाना पुलिस से शिकायत की है। सलीम की तरह, महानगर के ऐसे कई लोग हैं, जो गूगल से हेल्पलाइन नंबर की मदद लेने के चक्कर में रकम गवां बैठे।
गूगल पर साइबर अपराधी या ठग संबंधित कंपनी की हेल्पलाइन की जगह अपना मोबाइल नंबर डाल देते हैं। इसके बाद जैसे ही कोई गूगल पर किसी बैंक, डिजिटल पेमेंट वॉलेट, इंश्योरेंस, रेलवे, कोरियर, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी जैसे कंपनियों के हेल्पलाइन नंबर को ढूंढता है तो पहला रिजल्ट ठगों द्वारा अपलोड किए गए नंबर ही आते हैं। ऐसे में लोग समझ नहीं पाते और साइबर अपराधियों का शिकार बन जाते हैं।
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ऐसे होती है फर्जी वेबसाइट से ठगी
ठग बड़ी कंपनियों और फर्मों की वेबसाइट के नाम का उपयोग कर फर्जी आईडी बनाते हैं। इसमें हेल्पलाइन नंबर में ठग अपना मोबाइल नंबर अपलोड करते हैं। गूगल पर कंपनी का नाम डालते ही फर्जी कंपनियों के नंबर पहले सामने आते हैं। आमतौर पर लोग इंटरनेट पर आधी अधूरी कंपनी के नाम लिखकर खोज करते हैं, जिससे लोग यह जान पाते कि असली और नकली वेबसाइट कौन सी है।
यह बरतें सावधानी
- कंपनी की वेबसाइट से ही मिले कस्टमर केयर नंबर का प्रयोग करें
- कभी भी किसी भी हालत में ओटीपी किसी से भी साझा न करें
- बैंक शाखा में व्यक्तिगत जाना संभव न हो तो ईमेल करके जानकारी हासिल करें
- ठगी होने पर तुरंत बैंक की शाखा और पुलिस को सूचना दें
नंबर 1
- थाना सीपरी बाजार के आईटीआई निवासी अमित कुमार ने एक कंपनी का ऑनलाइन मोबाइल खरीदा था। इसमें गड़बड़ी आने पर उन्होंने गूगल से नंबर खोजा। मोबाइल वापस करने के एवज में साइबर अपराधियों ने खाते की जानकारी लेकर आठ हजार रुपये निकाल लिए।
नंबर 2
- कोतवाली के उनाव गेट निवासी राशिद ने टीवी रिचार्ज करने के लिए संबंधित कंपनी का गूगल से नंबर खोजकर कॉल की। साइबर अपराधियों ने ऑफर का हवाला देकर खाते की जानकारी लेकर बारह हजार रुपये निकाल लिए। मेसेज आने के बाद जानकारी मिली।
ऐसे मामलों में लोग सतर्क रहें। लोगों को गूगल से सीधे टोल फ्री नंबर लेने की बजाए वेबसाइटों पर जाकर टोल फ्री नंबर लेना चाहिए, क्योंकि सही साइट पर टोल फ्री नंबर मिलता है। किसी से भी खाता व ओटीपी की जानकारी साझा न करें।
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विवेक त्रिपाठी, एसपी सिटी, नोडल अधिकारी, साइबर थाना
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