बुंदेलखंड के पुरुषों में मुंह व फेफड़ा और महिलाओं में गर्भाशय (सर्वाइकल) का कैंसर सबसे ज्यादा हो रहा है। इसकी वजह बेतरतीब दिनचर्या, चटपटा भोजन, तंबाकू, गुटका व शराब का अत्यधिक सेवन है। डॉक्टर कहते हैं कि दिक्कतें नजरअंदाज करने से बीमारी का पता तब चलता है जब यह जानलेवा हो जाती है। यदि शुरुआत में पता चल जाए तो इलाज संभव है। यदि बिना कारण वजन कम हो रहा है, आराम करने पर भी थकान रहती है, रात में पसीना आता है, आवाज में बदलाव हो रहा है तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं।
मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि हर साल 400 से ज्यादा नए कैंसर रोगी परामर्श के लिए आ रहे हैं, जिनमें 80 से ज्यादा मुंह, 30 से ज्यादा फेफड़ा और 50 महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की हैं। वहीं, कई रोगी निजी अस्पताल अथवा उच्च चिकित्सा संस्थानों में जा रहे हैं, जिनका आंकड़ा यहां से अलग है। उन्होंने बताया कि कैंसर होने की अहम वजह तेज मसालेदार वसायुक्त भोजन, तनाव, व्यायाम व सैर न करने से मेटाबॉलिज्म (चयापचय) गड़बड़ होना आदि है।
घाव का लंबे समय तक बने रहना घातक
डॉ. माहुर बताते हैं कि फास्ट फूड का चलन खूब है, इसे चटपटा बनाने के लिए अजीनोमोटो (मोनोसोडियम ग्लूटामेट) डाला जाता है, जो सीधे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। लोग घंटों स्क्रीन पर गुजारते हैं, मगर शारीरिक मेहनत नहीं करते, इससे मेटाबॉलिज्म पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जो घातक है। तंबाकू, शराब, धूम्रपान, पान मसाला, सुपारी के सेवन से मुंह, फेफड़े, गले आदि के कैंसर का खतरा बढ़ता है। तेज मसालेदार व वसायुक्त भोजन, धीमी आंच पर पका या धुएं वाला भोजन बड़ी आंत के कैंसर का कारण होता है। घाव का लंबे समय तक बने रहना, जीभ अथवा गाल के अंदर छाले होना भी कैंसर का लक्षण है।
ये हैं कैंसर के प्रारंभिक लक्षण
बिना वजह वजन कम होना। थकान व कमजोरी होना। शरीर में गांठ होना। सूजन का ठीक न होना। शरीर के एक हिस्से में दर्द बना रहना। त्वचा का रंग बदलना। असामान्य जगह जैसे मल व मूत्र मार्ग से खून आना। लंबे समय तक खांसी रहना। निगलने में कठिनाई होना।
इन जांचों से होती है कैंसर की पुष्टि
सीबीसी (पूर्ण रक्त गणना), ब्लड प्रोटीन, ट्यूमर मार्कर की जांच होती है। इमेजिंग परीक्षण जैसे सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड होता है। गांठ आदि की बॉयोप्सी जांच कराई जाती है। इस तरह होता है उपचार ऑपरेशन कर ट्यूमर निकाला जाता है। इसके बाद कीमोथैरेपी दी जाती है। फिर रेडियोथैरेपी (विकिरण चिकित्सा) से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। इम्यूनोथैरेपी (प्रतिरक्षा प्रणाली सक्रिय करना) से भी उपचार होता है। हार्मोन थैरेपी से कैंसर पैदा करने वाले हार्मोन को अवरुद्ध किया जाता है। क्षतिग्रस्त रक्त कोशिकाओं को स्वस्थ कोशिकाओं से प्रतिस्थापित किया जाता है।