झांसी। कोरोना महामारी के बीच रेलवे वैगन मरम्मत कारखाने को सुंदर बनाने का काम तेजी से चल रहा है। यहां पर मुख्य कारखाना प्रबंधक कार्यालय के सामने बने वीआईपी गार्डन को हेरिटेज पार्क का रूप दिया जा रहा है, जिसमें कारखाने की पुरानी धरोहरों को सजा कर रखा जाएगा। कारखाने के अंदर भी कई बदलाव के कार्य चल रहे हैं। रेलवे बोर्ड ने इन कार्यों के लिए सात करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।
रेलवे कारखाने में ए, बी, सी, डी चार शेड बने हैं, जिनमें स्थित अलग- अलग शॉपों में कर्मचारी काम करते हैं। इन शेडों की चद्दर सालों से नहीं बदली थीं, जिससे जगह- जगह बारिश का पानी टपकने लगा था। बरसात में कर्मचारियों के लिए काम करना मुश्किल हो जाता था। इन चद्दरों की जगह एसी सीट लगाई जा रही है। दो शेड में काम भी पूरा हो गया है। सभी शेड में एल्युमीनियम पेंट से पुताई की गई है। शेडों में एल्युमीनियम पेंट से पुताई की गई है। सभी शेड के ऊबड़- खाबड़ हो गए फर्श को इंडस्ट्रीयल की तरह बनाया जा रहा है। वीआईपी गार्डन को हेरिटेज पार्क का रूप दिया जा रहा है, जिसमें कारखाने की धरोहरों को प्रदर्शन के लिए रखा जाएगा। गार्डन में सभी लोहे की ग्रिल की जगह स्टील ग्रिल लगाई जा रही है। स्क्रैप (बेकार लोहा) से यहां एक टावर बनाया गया है, जिस पर सत्यमेव जयते लिखा गया है। इस टावर के ऊपर स्क्रेप से बने शेर को खड़ा किया जाएगा। कर्मचारियों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए शेड ए, लुहार शॉप, कार्यालय के सामने और एसएसई यार्ड में चिलर प्लांट लगाए जा रहे हैैं।
डक में नहीं भरेगा पानी
कारखाने में दो डक बने हैं। इन डक पर वैगन के खड़े होने के बाद कर्मचारी नीचे के हिस्से में जाकर काम करते हैं। इन डक में बरसात में पानी भरने पर कर्मचारियों के लिए काम करना मुश्किल हो जाता था, लेकिन अब डक के नीचे से पाइप लाइन को डाल दिया गया है।
यह भी जानिए
वैगन मरम्मत कारखाना 1895 में स्थापित हुआ था। कारखाने में वेल्डिंग, पेंटिंग, एसएसई यार्ड, एसएसई रिहेब, बीडब्लूआर, पावर हाउस, मिडलाइट, धातुशाला, व्हील मशीन, आरबी फर्स्ट- सेकेंड- थर्ड, एयर ब्रेक लैब, टूल रूम समेत 22 शॉप हैं, जहां पर तकरीबन 3850 कर्मचारी कार्यरत हैं। 650 कर्मचारी विभागीय कार्यों में लगे हैं। देशभर से यहां वैगन मरम्मत के लिए भेजे जाते हैं। यहां एक माह में सात सौ से अधिक वैगनों की मरम्मत की जाती है।