झांसी। कामकाजी महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न पर अंकुश को प्रदेश सरकार द्वारा साल 2013 में लैंगिक उत्पीड़न निवारण, प्रतिषेध और परितोष अधिनियम लागू तो कर दिया गया है, लेकिन धरातल पर यह अब तक प्रभावी नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि इसके तहत अब तक आंतरिक शिकायत समितियां तक गठित नहीं हुई हैं।
कामकाजी महिलाएं कार्यस्थल पर भी सुरक्षित नहीं हैं। कई मामलों में उनके सहकर्मी ही उनके लिए खतरा बन जाते हैं। ऐसे में उन्हें हर समय अनहोनी की आशंका बनी रहती है। ज्यादातर मामलों में महिलाएं इसकी शिकायत भी नहीं कर पाती हैं और वह चुपचाप सब कुछ सहती रहती हैं।
इन परिस्थितियों पर अंकुश को प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2013 में लैंगिक उत्पीड़न निवारण, प्रतिषेध और परितोष अधिनियम लागू किया गया था, जिसके तहत प्रत्येक कार्य स्थल पर आंतरिक शिकायत समिति (विशाखा समिति) बनाई जानी थी, ताकि महिला कर्मचारी अपने उत्पीड़न की शिकायत समिति से कर सके। जांचोपरांत समिति अपनी रिपोर्ट नियोक्ता को सौंपेगी।
नियोक्ता द्वारा कार्रवाई न करने की स्थिति में समिति सीधे पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों के समक्ष भी मामला ले जा सकती है। लेकिन, उक्त अधिनियम फाइलों में दर्ज एक इबारत बनकर रह गया है। यहां तक कि सरकारी संस्थानों में भी यह समितियां गठित नहीं की गईं हैं।
यहां गठित होनी हैं विशाखा समितियां
झांसी। विशाखा समितियों के गठन का प्रावधान प्रत्येक सरकारी / अर्द्ध सरकारी विभागों, निगमों, उपक्रमों, निकायों व निजी क्षेत्र (श्रम विभाग के अंतर्गत आने वाले समस्त क्षेत्र) सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों, कालेजों, विश्वविद्यालयों तथा तकनीकी संस्थाओं के लिए है। समिति का कार्यकाल अधिकतम तीन वर्ष का तय किया गया है। साथ ही समिति को जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित करने होंगे।
हर साल डीएम को देनी होगी रिपोर्ट
झांसी। समिति को प्रत्येक वर्ष अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी व संबंधित नियोक्ता को देना जरूरी है। रिपोर्ट में साल भर में प्राप्त लैंगिक उत्पीड़न की शिकायतों की संख्या, शिकायतों का ब्योरा, नब्बे दिन से अधिक लंबित मामलों का विवरण तथा नियोक्ता द्वारा की गई कार्रवाई का ब्योरा देना होगा।
‘विशाखा समितियों के गठन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जल्द ही सभी कार्यस्थलों पर यह गठित कर दी जाएंगी। इसके लिए तैयारियां तेजी से जारी हैं।’
- राजीव शर्मा, जिला प्रोबेशन अधिकारी /नोडल अधिकारी