पांच माह का वेतन न मिलने से नाराज जल संस्थान के कर्मचारियों की हड़ताल से लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं। पाइप लाइनों में आने वाले लीकेज ठीक नहीं हो रहे हैं, जिससे पानी बर्बाद हो रहा है, साथ ही जलापूर्ति भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्र के कई स्थानों पर मोटर पंप फुंक गए, जो ठीक नहीं हो पा रहे हैं।
जलसंस्थान महाप्रबंधक के अधिकार क्षेत्र में झांसी, ललितपुर और उरई, जालौन की शहरी, नगर पालिका और नगर पंचायत की जलापूर्ति व्यवस्था आती हैं। इस व्यवस्था के संचालन में 400 अधिकारी, कर्मचारी और 800 के लगभग अस्थायी कर्मचारी लगे हैं, जिनका वेतन हर माह लगभग दो करोड़ रुपये बनता है। पिछले दो साल से शासन के निर्देश पर विजिलेंस यहां 500 करोड़ के भ्रष्टाचार की जांच कर रही है। इस भ्रष्टाचार के चलते विभाग को शासन स्तर से जरूरत के हिसाब से वित्तीय अनुदान नहीं मिल पा रहे हैं। उपभोक्ताओं से मिलने वाले जलकर से ही काम चलाया जा रहा है। जलकर से होने वाली सालाना आय से अधिकतम पांच महीने का ही वेतन दिया जा सकता है। इस कारण हर महीने वेतन देना संभव नहीं है। पिछले पांच महीने से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारी 26 नवंबर से महाप्रबंधक कार्यालय पर कार्य बहिष्कार कर क्रमिक अनशन कर रहे हैं।
इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था गड़बड़ाना शुरू हो गई है। बरुआसागर, समथर, मऊरानीपुर, गरौठा, पूंछ, पहूज, गुरसराय में अधिकांश मोटर पंप फुंक गए हैं। सभी जगह एक-एक पंप के भरोसे ही आपूर्ति दी जा रही है। दूसरा, सर्दी में लीकेज भी बढ़ते जा रहे हैं। लीकेज ठीक न होने के कारण कीमती पानी बर्बाद हो रहा है। मिशन कंपाउंड स्थित महानगर के कार्यालय में हड़ताल के कारण सन्नाटा पसरा है। लोग लीकेज, हैंडपंप खराब होने जैसी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं, मगर उनको मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
कर्मचारियों की हड़ताल खत्म कराने की कोशिशें चल रही हैं। शनिवार को मंडलायुक्त ने कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया था लेकिन कर्मचारी नहीं आए। सोमवार को दोबारा वार्ता के लिए बुलाया जाएगा। अगर, इस बीच कोई बड़ा लीकेज या जलापूर्ति संचालन में कोई समस्या आती हैं तो उसे प्राइवेट मजदूरों से दुरुस्त कराया जाएगा। - राजेश कुमार यादव, महाप्रबंधक जलसंस्थान।
हड़ताल को खत्म करने की कोशिशें तेज
शासन से अनुपूरक बजट में वित्तीय सहायता मिलना अभी संभव दिखाई नहीं दे रही है। इस कारण जलसंस्थान के अधिकारियों ने कर्मचारियों की हड़ताल को खत्म करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसके लिए यूनियन के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों से भी बातचीत चल रही है। विभाग के पास अभी सवा करोड़ रुपये हैं, जिसको वह वेतन के रूप में बांटने की तैयारी कर रहा है। यह पैसा सिर्फ कर्मचारियों में बांटा जाएगा। ताकि एक-दो महीने का वेतन बंटने के बाद राजस्व वसूली पर जोर दिया जा सके। दिसंबर से शिविर लगाकर राजस्व वसूली होना शुरू हो जाती है। तय हो रहा है कि राजस्व आने पर पिछले एक-एक कर महीनों का वेतन भुगतान कर दिया जाएगा।
जारी रहा अनशन
जलसंस्थान कर्मचारियों का क्रमिक अनशन शनिवार को भी महाप्रबंधक कार्यालय पर जारी रहा। वक्ताओं ने कहा कि महाप्रबंधक को कर्मचारियों से कोई सहानुभूति नहीं है। उन्होंने एक बार भी अनशन स्थल पर आकर कर्मचारियों नेताओं से बात नहीं की। न ही मंडलायुक्त से वार्ता के लिए कोई लिखित पत्र दिया। अनशन पर मुरलीधर पटैरिया, शशिकांत श्रीवास्तव, बाबूलाल यादव, लखन लाल योगी, शंभू शरण दुबे बैठे। इस मौके पर रामप्रकाश गोस्वामी, शहनबाज खान, अवधेश नारायण चतुर्वेदी, मनोज गुप्ता, सत्येंद्र राठौर, रविकांत राजपूत, सुनील मिश्रा, संजीव साहू, पूरन प्रजापति, नर्वदा, साधना, ममता, नीलम, रेखा, इंद्रा गुप्ता मौजूद रहे।