झांसी। आषाढ़ की गुप्त नवरात्र 11 जुलाई रविवार से शुरू होंगे। सर्वार्थ सिद्धि योग एवं रवि पुष्य में मां दुर्गा की उपासना श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी होगा। समस्त शुभ कार्य के लिए यह योग विशेष शुभ होते हैं। देवी मंदिरों में भी कलश स्थापना कर मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाएगी। महानगर के देवी मंदिरों में पूजा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
सनातन धर्म में शारदीय चैत्र नवरात्र के अलावा दो गुप्त नवरात्र माघ और आषाढ़ के महीने में होते हैं। तंत्र साधना और मंत्र सिद्धि के लिए गुप्त नवरात्र का व्यापक महत्व रहता है। साधक मंदिरों में और आश्रमों में गोपनीय अनुष्ठान करते हैं। पंडित शांतनु पांडेय ने बताया कि 11 जुलाई को पुष्य नक्षत्र रहेगा। रविवार होने पर रवि पुष्य का योग होगा, जो बहुत शुभ रहता है। सर्वार्थ सिद्धि योग होने पर सभी शुभ कार्य शुद्ध होंगे। उनके अनुसार गुप्त नवरात्र में साधक मंत्र सिद्ध करते हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्र की तरह मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की भक्त विधिवत पूजा करते हैं। अष्टमी और नवमी को हवन कर अनुष्ठान तथा व्रत की पूजा होती हैं। साथ ही कन्याओं की भी पूजा की जाती है। इधर, आषाढ़ की नवरात्र को लेकर महानगर के देवी मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कैमासन माता मंदिर, पंचकुइया मंदिर, महाकाली मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में माता के दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ेंगे।