जीएसटी में कृषि यंत्रों पर भी टैक्स बढ़ा दिया गया है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा। अभी तक किसी को ट्रैक्टर की ट्राली बनवाने में 90 से एक लाख रुपये खर्च करने पर साढ़े छह हजार रुपये टैक्स देना पड़ता था, अब उसे 18 प्रतिशत के हिसाब से टैक्स देना होगा।
खेती में ट्रैक्टर के साथ ट्रॉली, कल्टीवेटर, ऐरो, बीज बोने की मशीन ऐसे यंत्र हैं, जिनकी हमेशा आवश्यकता पड़ती है। किसान को यह सभी यंत्र बाजार में ही बनवाने पड़ते हैं। अभी ट्राली पर साढ़े छह प्रतिशत टैक्स था। बाकी कृषि उपकरण बनवाने पर कोई टैक्स नहीं था। मगर, जीएसटी में टॉली बनवाने पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। इसी तरह खेती से जुड़े अन्य उपकरणों में 12 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान कर दिया गया है। अगर, कोई किसान एक लाख की ट्रॉली बनवाता है तो उसे 18 हजार रुपये टैक्स देना होगा। कृषि यंत्रों पर टैक्स का प्रावधान होने से अब इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा। कृषि यंत्र बनाने के कारोबारी परमिंदर सिंह का कहना है कि किसान किसी भी कीमत पर टैक्स देने को तैयार नहीं है। वह बिना बिल के काम कराना चाहता है। इस कारण मार्केट में ग्राहक ही नहीं आ रहे हैं।