आम दिनों में खुल्ले की समस्याओं से जूझते व्यापारियों को नोटबंदी ने व्यापार की स्मार्ट राह दिखाई है। कैश की कमी से जूझ रहे लोगों से व्यापारी कैशलेस व्यापार कर रहे हैं। उनसे वह मोबाइल वॉलेट और स्वैप मशीन के माध्यम से भुगतान लेकर नकदी के संकट से निपट रहे हैं। स्मार्ट व्यापार ने उन्हें खुल्ले की समस्या का समाधान भी दिया है। ई-पेंमेंट से जहां व्यापारियों को राहत मिली है, वहीं ग्राहकों को भी इससे सहूलियत हो रही है।
एक हजार और पांच सौ के नोट अमान्य होने के बाद बाजार काफी हद तक ठप हो गया था। बैंकों से रुपये निकालने की सीमा निर्धारित होने के कारण लोगों के सामने नकदी का संकट उत्पन्न हो गया और वह जरूरत के सामान की ही खरीदारी कर रहे हैं। इस संकट से निपटने के लिए दुकानदारों ने खुद को स्मार्ट बनाना शुरू कर दिया है। दुकानदार मोबाइल वॉलेट के लिए पेटीएम, एसबीआई के बडी से भुगतान ले रहे हैं। वहीं, स्वैप मशीनों के लिए भी बैंकों में आवेदन किए गए हैं। स्वैप मशीन की अचानक मांग बढ़ने के कारण बैंक भी निर्धारित समय में इनकी पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।
निकाल ली मशीन
सीपरी बाजार में सराफा व्यापारी उदय सोनी ने बताया कि आठ महीने पहले बैंक वालों ने स्वैप मशीन लगवा दी थी उस समय इसका कोई उपयोग नहीं हो रहा था, तो लगा कि फालतू में लगवा लिया। लेकिन, नोटबंदी के बाद इसका उपयोग हो रहा है। खरीदारी के बाद ग्राहक नकद रुपये न होने के कारण कार्ड से ही भुगतान कर रहे हैं। नब्बे प्रतिशत भुगतान कार्ड से ही हो रहे हैं।
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ले रहे पेटीएम से भुगतान
किराना व्यापारी अमित साहू ने बताया कि नोटबंदी के बाद व्यापार पूरी तरह ठप हो गया था। बैंक में जाकर स्वैप मशीन का आवेदन किया तो दो तीन दिन पहले ही लग र्गई है। अब बिक्री सामान्य हो गई है। पेटीएम भी डाउनलोड कर लिया है। अब उससे भी भुगतान लिया करूंगा। किराने का सामान मूलभूत जरूरतों का सामान होने के बाद भी लोग पहले जैसी खरीदारी नहीं कर पा रहे थे। कार्ड से भुगतान की सुविधा होने के कारण अब पहले जैसा व्यापार होने लगा है।
जनधन के खातों में धनवर्षा
झांसी। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खोले गए खातों में भले ही दो साल में एक भी रुपये जमा न हुआ हो, लेकिन नोटबंदी के बाद इन खातों में जमकर धन वर्षा हुई है। पंजाब नेशनल बैंक की सहयोगी ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत सर्व यूपी ग्रामीण बैंक की शाखाओं में 65,764 जनधन खाते हैं। नोटबंदी के बाद इनमें 34 करोड़ सत्ताइस लाख रुपये जमा हुए हैं।
जिले में सर्व यूपी ग्रामीण बैंक की 37 शाखाएं हैं, इनमें से सात शहर में हैं। नोटबंदी के पहले अधिकतर खातों में जीरो बैलेंस था। नोटबंदी के बाद इनमें अचानक रुपये जमा होना शुरू हो गए। जमा रुपयों में से छह करोड़ बारह लाख रुपये निकाले भी जा चुके हैं।
पंजाब नेशनल बैंक के पास कैश कम होने के कारण इस बैंक की शाखाओं को कैश की किल्लत से गुजरना पड़ रहा है।
बैंक के मंडल प्रबंधक सुरेश कुमार व्यास ने बताया कि कैश की समस्या काफी हद तक सुलझ गई है, लेकिन मांग के मुताबिक अभी भी रुपये नहीं दे पा रहे हैं। अगले हफ्ते कैश आने की उम्मीद है, जिससे राहत मिलेगी। जिलाधिकारी ने भी हमारी शाखाओं को कैश मुहैया कराने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को पत्र लिखा है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों से कैशलेस भुगतान के लिए भी अपील की जा रही है। अभी तक पंद्रह हजार लोगों ने एटीएम कार्ड के लिए आवेदन किए हैं।