झांसी। बृज की लोक कलाएं समाज को एकता व प्रेम का संदेश देती हैं। यह कला श्रृंगार से ओत-प्रोत है। यह बातें यश भारती पुरस्कार विजेता मशहूर लोक नृत्यांगना गीतांजलि शर्मा ने अमर उजाला से बातचीत में कहीं। वह झांसी जन महोत्सव में प्रस्तुति देने आई हैं। उनका कहना है कि पहचान मिलने के बाद लोग उन्हें राधा कहकर बुलाने लगे हैं, जो उन्हें पसंद है।
बृज की लोक कलाओं को राधा-कृष्ण के प्रेम के जरिए पेश कर अपनी अलग पहचान बनाने वाली गीतांजलि शर्मा ने बृज की लोक कला के अहम पहलुओं को साझा करते हुए बताया कि मयूर रास व फूलों की लठमार होली इस कला की विशेषता है। जो विश्वस्तरीय रूप में सामने आ रही है। इसके माध्यम से हम ईश्वर की आराधना करते हैं। इस क्षेत्र में
नाम कमाने के लिए वह ईश्वर की कृपा मानती हैं।
इस कला को कॅरियर के रूप में चुनने को लेकर उन्हें परिवार का विरोध सहना पड़ा। वह नहीं चाहते थे कि मैं मंच पर सबके सामने नृत्य करूं। हालांकि पिता ने उनकी मदद की। उन्होंने बताया कि वह भारत में 1000 से ज्यादा स्टेज शो के अलावा यूके, मैक्सिको, सिंगापुर व चाइना में भी प्रदर्शन कर चुकीं हैं।
वह कहती हैं कि भोपाल में शो के बाद एक सज्जन ने शो देखकर तनाव मुक्त होने व बीमार व्यक्ति के भी ठीक होने की बात कही थी। इस प्रतिक्रिया को वह अपने कॅरियर की उपलब्धि के रूप में देखती हैं। वह नए प्रयोग के तहत कला के भाव के आधार पर धुन की प्रस्तुति देने की कोशिश करती हैं। इसमें वेशभूषा और मेकअप भी अहम होता है। वहीं, राधा को एक प्रेमिका के अलावा एक शक्ति के रूप में दिखाना उनके प्रयोग का अहम पहलू है।
उन्होंने कहा कि राधा-कृष्ण के प्रेम से युवाओं को प्रेरणा लेने की जरूरत है। उनके प्रेम को महसूस करने की जरूरत है। एक-दूसरे से बिना मिले भी प्रेम को जीवित रखा जा सकता है।
स्टैंडअप कॉमेडी का असली रूप सामने आना बाकी
झांसी। स्टैंडअप कॉमेडी के वास्तविक रूप को अभी हिंदुस्तान ने पहचाना ही नहीं है। यह बहुत ही पावरफुल विधा है। कुछ लोग स्टैंडअप कॉमेडियन के रूप में सिर्फ चुटकले परोस रहे हैं। यह बातें मशहूर कॉमेडियन राजीव निगम ने झांसी जन महोत्सव में खास बातचीत के दौरान कहीं।
वहीं, राजीव निगम ने कॉमेडी शो में हो रहे द्विअर्थी संवादों के अधिक इस्तेमाल को बाजारवाद का असर बताया। उनका कहना है कि टीआरपी की दौड़ में आगे निकलने के चक्कर में यह सब हो रहा है। स्टेज कॉमेडी और फिल्मी कॉमेडी के बीच के अंतर पर उन्होंने बताया कि इस दौर में टीवी पर आने के बाद लोगों को इतना नाम और पैसा मिल जाता है कि उनको शायद ही किसी फिल्म की जरूरत पड़े।
कहा कि 20 फिल्में करने के बाद भी मुझे दर्शकों ने छोटे पर्दे पर आने के बाद सराहा और पसंद किया। टीवी पर ज्यादातर महिला चरित्र के रूप में आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि शायद वह ही पहले ऐसे कॉमेडियन हैं जो महिला कैरेक्टर के रूप में दर्शकों से रूबरू हुए। इस तरह के चरित्र को वह अपने आस-पास के माहौल से उठाते हैं, फिर उस पर स्क्रिप्ट लिखते हैं।
राजीव का कहना है उन्हें सामाजिक बुराइयों पर हास्य के माध्यम से प्रहार करना ज्यादा पसंद है। कहा कि वह फिलहाल अभी एक शो पर काम कर रहे हैं, जिसमें दर्शकों को सच्चाई व सामाजिक संवेदनाओं से मिश्रित हास्य देखने को मिलेगा। वहीं युवाओं को मुकाम को हासिल करने के लिए नियंत्रण में रहने व शॉर्टकट से परहेज करने का सुझाव दिया।
वहीं, महोत्सव में प्रस्तुति देने आए ‘कॉमेडी सर्कस’ के विनर रहे कॉमेडियन राजा ने कहा कि इस दौरान में मुकाम पाने के लिए टैलेंट जरूरी है। सलमान की मिमिक्री ने उन्हें लोगों के बीच पहचान दिलाई। वह कहते हैं कि उनका रुझान कोरियोग्राफी की ओर था लेकिन किस्मत ने उन्हें कॉमेडियन बना दिया।