झांसी। अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध दिवस के मौके पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में गिद्ध जागरूकता दिवस का आयोजन किया गया। इस मौके पर गिद्धों को बचाने के लिए प्रदेश में किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मंडलायुक्त कुमुदलता श्रीवास्तव ने कहा कि गिद्ध पर्यावरण के प्राकृतिक सफाई कर्मी हैं। आज गिद्ध केवल एक फीसदी ही बचे हैं। यही कारण है कि उनको बचाने के भरसक प्रयास किये जा रहे हैं। वन संरक्षक ए के सिंह ने बताया कि गिद्धों की मृत्यु का मुख्य कारण जानवरों व मवेशियों के इलाज में काम आने वाली दवा डाइक्लोफिनेक रही है। उपचार के तीन दिन के अंदर मौत हो जाने पर इस दवा के अंश मृत जानवर के शरीर में ही रह जाते हैं। मृत जानवरों का मांस खाने के कारण दवा गिद्धों के गुर्दे पर असर करती है, जिससे उनकी मौत हो जाती। इसे देखते हुए सरकार ने वर्ष 2006 में इस दवा को प्रतिबंधित कर दिया था।
कार्यक्रम में झांसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित, बीएनएचएस (बॉंबे नेचुरल सोयायटी मुंबई) के गिद्ध संरक्षण प्रोजेक्ट की वरिष्ठ विज्ञानी अलका दुबे, प्रभागीय वनाधिकारी वीके मिश्रा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेंद्र सिंह तोमर व वन विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे।