झांसी। शहर के भीतर जीआईएस सर्वे का काम बेहद सुस्त रफ्तार से चल रहा है। जून महीने तक कंपनी को काम पूरा करना था लेकिन, अब तब साठ वार्डों में सिर्फ 8 वार्डों में ही काम पूरा हो सका। काम में दिलचस्पी न लेने की वजह से नगर निगम ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
नगर निगम भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) की मदद से शहर के सभी भवनों की डिजिटल मैपिंग करा रहा है। निगम को इससे आय बढ़ने में मदद की उम्मीद है। अभी टैक्स निरीक्षक की गणना के आधार पर हाउसटैक्स लगता है। अमूमन एक बार भवन का वार्षिक मूल्यांकन (एआरबी) तय होने के बाद उसका पुनरीक्षण नहीं होता जबकि मौके पर दोमंजिला से तिमंजिला तक मकान बन जाते हैं। इनका हाउसटैक्स सिर्फ कच्चे मकान का ही जमा होता रहता है। निगम को सलाना करोड़ों की चपत सहनी पड़ती है। इसके चलते शासन ने यहां जीआईएस सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। शासन ने मेसर्स आईटीआई लिमिटेड को यह काम सौंपा लेकिन, एजेंसी समय पर काम पूरा नहीं कर सकी। निगम अफसरों के मुताबिक अभी तक काम पूरा हो जाना था लेकिन, सिर्फ आठ वार्डों में काम पूरा हुआ। एजेंसी ने अभी तक 40120 संपत्ति का सर्वे कर चुकी। इनमें 9854 संपत्तियों का ही सत्यापन कराया जा सका। इनमें 599 संपत्ति ऐसी पाई गई जिनके एआरबी में पचास फीसदी का अंतर है।
जीआईएस सर्वे का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ। इस वजह से कंपनी को नोटिस दिया गया है। कंपनी को तेजी से काम करने के लिए कहा गया है। काम पूरा न करने पर कार्रवाई की जाएगी।
अवनीश राय
नगर आयुक्त