घबराइए नहीं, सतर्क रहिए, कोरोना को मात दे चुके हैं झांसी के 12,103 मरीज
झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण के इस दौर में हर ओर से निराशाजनक खबरें सामने आ रही हैं, जिससे लोग दहशत में है। लेकिन, कोरोना से घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सतर्क रहकर इससे लड़ने की जरूरत है। जिले में कोरोना के 12,103 मरीज इस महामारी को मात दे चुके हैं और अब वे पूरी तरह से स्वस्थ हैं। इसमें से 2,448 से अधिक मरीज तो ऐसे हैं, जो घर बैठे ही इस बीमारी से निजात पा चुके हैं।
कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से अपना दायरा बढ़ाता जा रहा है। मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही बढ़ रही हैं दुश्वारियां। कहीं ऑक्सीजन की कमी की वजह से मरीजों की मौत के मामले सामने आ रहे हैं, तो कहीं अस्पतालों में दाखिल होने के लिए लोग भटक रहे हैं। हर ओर भय का माहौल बना हुआ है। बच्चे - बढ़े सभी भयभीत हैं। लेकिन, ये स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों की मानें तो मानसिक अवसाद की स्थिति तक में लाकर खड़ा कर सकती है। लेकिन, इन सब के बीच एक तस्वीर ऐसी भी है जो आशा की किरण जगाती है। पिछले लगभग एक साल के दरम्यान कोरोना वायरस का संक्रमण जिले में 17,968 लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है, इनमें से 12,103 मरीज इस महामारी को मात दे चुके हैं। इनमें से 2,448 मरीज तो ऐसे हैं, जिन्हें अस्पताल तक जाने की जरूरत नहीं पड़ी। होम आइसोलेशन में रहकर ही इस बीमारी को उन्होंने शिकस्त दे दी। आंकड़े गवाह हैं कि कोरोना से ग्रसित ज्यादातर मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। ऐसे में इस बीमारी से डरने या घबराने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि, सतर्क रहने की जरूरत है। बीमारी की चपेट में आने से बचने के लिए अपनी प्रतिरोधक क्षमता के साथ-साथ सोच को मजबूत रखिए। बेवजह कतई घर से बाहर मत निकलिए। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे आसान उपाय अनिवार्य रूप से अपनाइये। साथ कोरोना की वैक्सीन लगवाने के लिए आगे आइए।
दिमाग पर डर हावी न होने दें
झांसी। कोरोना संक्रमण काल में पैदा हुई विषम परिस्थितियों के बीच दिमाग पर डर को कतई हावी न होने दें। ये कहना है मनोचिकित्सक डॉ. अर्जित गौरव का। उन्होंने बताया कि दिनचर्या में परिवर्तन लाएं। सुबह घर में रहकर ही योग, प्रणायाम व ध्यान करें। कोरोना की मृत्यु दर महज दो प्रतिशत है, जबकि इसका डर दो सौ प्रतिशत हावी है। अच्छा और सकारात्मक सोचें। पसंदीदा फिल्म व गाने सुनें। अच्छी पुस्तकें पढ़ें। घर में रहकर परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। दिल और दिमाग को मजबूत रखकर हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला करने को तैयार रहें।