एक अक्तूबर से लागू नई व्यवस्था के बाद से टीटीई बर्थ आवंटित करने से हाथ पीछे खींच रहे थे, इससे राजस्व का नुकसान हो रहा था, साथ ही लोगों को भी परेशानी हो रही थी।
पहले बर्थ खाली होने पर टिकट चेकिंग कर्मी उचित किराया लेकर सीट यात्री को आवंटित कर देता था। यात्री भले ही जनरल टिकट ही क्यों न लिए हो। मगर, रेलवे बोर्ड ने एक अक्तूबर से चेकिंग कर्मियों के इस अधिकार को छीन लिया था। नई व्यवस्था के तहत अगर कोई बर्थ खाली है तो वह उस स्टेशन से ट्रेन छूटने से पहले ही अगले ठहराव स्टेशन के लिए वह सीट ट्रांसफार्मर को जाएगी और इसके बाद संबंधित स्टेशन से किसी यात्री का वेटिंग टिकट कंफर्म हो जाएगा। इस व्यवस्था से ट्रेन चलने के ठीक पहले जनरल टिकट पर सीट की चाह रखने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ी हुई है।
हालांकि, कुछ दिन बाद रेलवे बोर्ड ने राहत दी थी कि टीटीई अगले स्टेशन की कोटे वाली सीटों को अंतिम चार्ट देखने के बाद जनरल टिकट के यात्रियों को आवंटित कर सकता है। इसी तरह अब अगर कोई यात्री अपनी बर्थ (यात्रा स्थगित करना) पर नहीं आता है तो टीटीई अपने विवेक पर पहले उस दूरी तक आरएसी, वेटिंग व इसके बाद जनरल टिकट पर सीट दे सकता है।
उदाहरण के लिए किसी ट्रेन में यात्री का दिल्ली से भोपाल के लिए आरक्षण है और वह अंतिम समय अपनी यात्रा स्थगित कर देता है। ऐसी स्थिति में टीटीई उक्त बर्थ को आवंटित करने के लिए दिल्ली से भोपाल जा रहे आरएसी टिकट धारक को तलाशेगा। आएसी नहीं है तो वेटिंग टिकट को बर्थ दी जाएगी। अगर वेटिंग टिकट का भी यात्री नहीं मिले तो जनरल टिकट पर रसीद बनाकर बर्थ आवंटित की जा सकती है।
‘सभी नियमों को टिकट चेकिंग कर्मचारियों सेे नियमानुसार पालन कराने को कहा गया है। यात्रियों को परेशानी से बचाने के लिए नियम बनाए जाते हैं’
गिरीश कंचन, मंडल वाणिज्य प्रबंधक।