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Jhansi News: 20 दिन पहले दिया शपथ-पत्र फिर कर रहे निजी प्रैक्टिस

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। मेडिकल कॉलेज व सरकारी अस्पताल के स्थायी डॉक्टरों को हर साल 1.70 करोड़ रुपये नॉन प्रैक्टिस अलाउंस दिया जाता है। एक पखवाड़ा पहले मेडिकल कॉलेज के 56 और जिला अस्पताल के 25 डॉक्टरों ने फिर निजी प्रैक्टिस न करने का शपथ पत्र दिया था। बावजूद इसके ज्यादातर डॉक्टर बेधड़क निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं।

पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर सख्त नाराजगी जताई थी। महानगर में हाल यह है कि मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल के स्थायी चिकित्सक अपने नर्सिंगहोम अथवा दूसरों के नर्सिंगहोम में ओपीडी चला रहे हैं। जहां हर मरीज से 300 से 500 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है। खास बात यह है कि अधिकांश डॉक्टर मेडिकल कॉलेज के आसपास और कानपुर बाईपास पर बने नर्सिंगहोम में नियमित रूप से बैठ रहे हैं, जिनकी तरफ किसी का भी ध्यान नहीं है। कई डॉक्टरों के दो-तीन मंजिला नर्सिंगहोम भी हैं, जहां दोपहर दो बजे के बाद बैठकर रोगियों को देखते हैं और ऑपरेशन भी करते हैं।
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0- एलआईयू ने रिपोर्ट दी, विजिलेंस कर रही निगरानी



आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि डीएम की अध्यक्षता में बनी निगरानी कमेटी में विजिलेंस टीम को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा एलआईयू (लोकल इंटेलीजेंस ब्यूरो) भी अपनी रिपोर्ट दे चुकी है।

0- बेसिक का 20 फीसदी मिलता है नॉन प्रैक्टिस अलाउंस



स्थायी डॉक्टरों को शासन की तरफ से बेसिक वेतन का 20 फीसदी नॉन प्रैक्टिस अलाउंस के रूप में मिलता है। सूत्रों की मानें तो मेडिकल कॉलेज हर साल 56 डॉक्टरों का 1.30 करोड़ रुपये का नॉन प्रैक्टिस अलाउंस भुगतान करता है। कमोबेश जिला अस्पताल के डॉक्टरों को भी करीब 40 लाख रुपये का भुगतान होता है।

0- वर्जन



1. जिला अस्पताल के सभी स्थायी 25 डॉक्टरों ने करीब 20 दिन पहले निजी प्रैक्टिस न करने का शपथ-पत्र दिया है। डीएम की अध्यक्षता में गठित टीम के अलावा एलआईयू भी सक्रिय है। - डॉ. प्रमोद कटियार, एसआईसी जिला अस्पताल
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मेडिकल कॉलेज के सभी स्थायी डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करने के बाबत पत्र भेज दिया है। सभी ने निजी प्रैक्टिस नहीं करने के शपथ-पत्र भी दिए हैं। - डॉ. मयंक सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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