श्रेणी - कोर्ट
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गवाही से मुकरने पर वादी को तीन साल की सजा
- करीब 23 साल पहले रक्सा क्षेत्र में दो लोगों पर दर्ज कराई थी हत्या की रिपोर्ट
- जुलाई 2001 में सुनवाई के दौरान आरोपियों के समर्थन में दिए थे बयान
- आरोपियों को दोष मुक्त करने के बाद अदालत ने खुद दाखिल कराया था परिवाद
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या आठ राधेमोहन श्रीवास्तव की अदालत ने गवाही से मुकरने के मामले में वादी को तीन साल की सजा और तीन हजार रुपये जुर्माना लगाया है। मामला करीब 23 साल पुराना हत्या का है। 2001 में सुनवाई के दौरान वादी आरोपियों से मिलकर उनके पक्ष में बयान दे दिए थे।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संतोष कुमार दोहरे के अनुसार थाना रक्सा के पुनावली कला गांव निवासी रंजीत सिंह ने थाने में उसके भाई वीरेंद्र सिंह की हत्या की रिपोर्ट 19 नवंबर 1997 को पंजाब सिंह और पहलवान सिंह उर्फ लल्लू पर दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद दोनों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। जुलाई 2001 को तत्कालीन जिला जज उमेश्वर पांडेय की अदालत में सुनवाई के दौरान वादी रंजीत ने लंच से पहले अभियुक्तों के खिलाफ बयान दिए। इसी तिथि में लंच के बाद वादी ने आरोपियों का समर्थन करते हुए उनके पक्ष में बयान दिए। इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर की।
इसके बाद आरोपियों को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया था। मामले को गंभीरता से लेेते हुए तत्कालीन जिला जज ने अदालत में गवाही से मुकरने के मामले में धारा 193, 194 आईपीसी का परिवाद सीजीएम के यहां दाखिल कराया था। जिस पर न्यायालय ने उसे तलब भी किया था। उस आदेश के विरुद्घ वादी उच्च न्यायालय की शरण में चला गया था। साल 2019 में उच्च न्यायालय ने उसकी अपील को खारिज कर दिया था। इसके बाद अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या आठ में मुकदमा चला। बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान वादी रंजीत को गवाही से मुकरने का दोष सिद्घ हुआ। इस पर अदालत ने उसे तीन साल का कारावास व तीन हजार का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भी उसे भुगतना होगा।