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हांफते-हांफते दौड़ रहा हाईटेंशन तारों में करंट

Fri, 08 Jul 2016 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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bitut bibhag, news news - फोटो : demo
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झांसी। दुनारा ट्रांसमिशन बिजली घर से जुड़े होने के बाद भी मेडिकल सब स्टेशन के उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। यह बिजली घर तीस साल पुरानी 33 केवीए लाइन से जुड़ा हुआ है, जिसमें आए दिन फाल्ट होने की समस्या आम हो गई है। समस्या के निदान के लिए नई विद्युत लाइन बन गई है, मगर तकनीकी कारणों से करंट नहीं
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दौड़ पा रहा है। जाहिर है कि इस सबस्टेशन से जुड़े मोहल्लों को अभी और बिजली संकट झेलना होगा।

पेरा मेडिकल कॉलेज के निकट बना मेडिकल सब स्टेशन तीस साल पुराना बिजली घर है। महानगर का यह एक ऐसा बिजली घर है जो हंसारी ट्रांसमिशन हाउस से जुड़ा नहीं है। पहले इस सब स्टेशन को 18 किलोमीटर दूर स्थित पारीछा 132 केवीए ट्रांसमिशन पावर हाउस से करंट मिलता था। मगर, पिछले दो साल से सब स्टेशन को बड़ागांव के दुनारा में बनाए गए 220 केवीए ट्रांसमिशन पावर हाउस से जोड़ दिया गया। करंट मिलने की दूरी तो कम हो गई, मगर 33 केवीए लाइन पुरानी ही रही। पुरानी जर्जर लाइन में तेज हवा, बारिश होते ही फाल्ट आ जाते हैं। कई खंभे भी नीचे से टेढ़े हो गए है। सब

स्टेशन से घनी आबादी वाले क्षेत्रों के अलावा मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पैरा मेडिकल कॉलेज, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय समेत दो पानी की टंकियां जुड़ी हुई हैं। शहर के साढ़े ग्यारह हजार उपभोक्ताओं को यहीं से बिजली मिलती है। 
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‘ट्रांसमिशन विभाग को नई लाइन को जोड़ना है। मगर, वह कुछ रुकावटें बता रहे हैं। इस मामले में उच्च अधिकारियों को पत्र लिख दिया गया है।’
पंकज अग्रवाल, अधिशासी अभियंता (द्वितीय)। 

दिक्कत
बड़ागांव के दुनारा स्थित 220 केवी लाइन से आने वाली 33 केवीए की विद्युत लाइन गोरामछिया ब्लास्टिंग जोन से पंद्रह किलोमीटर की दूरी तय करके मेडिकल सब स्टेशन तक पहुंचती है। 30 साल पुरानी लाइन के तार जर्जर हो चुके हैं। खंभों के बीच दूरी अधिक होने के कारण कई जगह तार झूलते नजर आते हैं। एक माह में कम से कम दस बार तार टूटने की घटनाएं होती है। ऐसे फाल्टों को सुधारने में तीन से चार घंटे लग जाते हैं। 

कोशिश
आए दिन फॉल्ट की समस्या को देखते हुए विभाग ने दुनारा से मेडिकल सब स्टेशन तक डबल सर्किट की 33 केवीए नई लाइन तैयार कर ली है। एक सर्किट से मेडिकल व दूसरे सर्किट से विश्वविद्यालय क्षेत्र में बनने वाले नए सब स्टेशन को बिजली दी जानी है। मगर, ट्रांसमिशन विभाग कह रहा है कि दुनारा 220 केवी ट्रांसमिशन बिजली घर पर अभी सबवे खाली नहीं है, जिससे उक्त नई 33 केवीए लाइन को बिजली दी जा सके। 

एक नजर
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- मेडिकल सब स्टेशन से नारायण बाग, शिवाजी नगर, वीरांगना नगर, कोछाभांवर, अंसल, मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय व इंजीनियरिंग कॉलेज फीडर जुड़े हुए हैं। 
- यहां दस एमवीए के दो व आठ एमवीए का एक ट्रांसफार्मर हैं। इनसे इलाके के 105 मिनी ट्रांसफार्मर जुड़े हैं।
- पांच लाख यूनिट बिजली बेची जाती है जिसके जरिए विभाग को लगभग सवा करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है।

ये प्रमुख मोहल्ले जुड़े हैं
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- कोछाभांवर, करगुवा, सिंधी कॉलोनी, पिछोर, वीरांगना नगर, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, शिवाजी नगर, महाराणा प्रताप नगर, वकील कॉलोनी, जेडीए कॉलोनी, डड़ियापुरा, नारायण बाग, तलैया, मद्रासी कॉलोनी, सत्यम कॉलोनी, टीचर्स कॉलोनी, बाहर बड़ागांव गेट, सखी के हनुमान आदि क्षेत्र जुड़े हैं।

यह भी समस्याएं
- वीरांगना नगर व शिवाजी नगर फीडर की 11 केवीए लाइन एक ही खंभे से होकर जाते हैं। शिवाजी नगर फीडर में अधिकांश समय ओवर लोडिंग की स्थिति बनी रहती है। 11 केवीए लाइन में दो सौ एंपियर करंट दौड़ना चाहिए, मगर शिवाजी नगर फीडर में 280 एंपियर करंट की मांग रहती है, इससे अक्सर शिवाजी नगर फीडर में फाल्ट की समस्या बनी रहती है।

फाल्ट को सुधारते समय शिवाजी नगर के साथ- साथ वीरांगना फीडर की लाइन भी बंद करनी पड़ती है। नारायण बाग फीडर में भी 230 एंपियर करंट की मांग होने से इस लाइन में भी आए दिन फाल्ट की समस्या बनी रहती है।
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