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पिता जी ने देखा सपना, मैंने साकार किया

Wed, 11 May 2016 02:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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garima - फोटो : amar ujala
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गरिमा सिंह का परिचय:-
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नाम :- गरिमा सिंह
जन्म तिथि:- 14 फरवरी 1987
माता-पिता का नाम :- ममता सिंह व ओंकार नाथ सिंह
सास-ससुर का नाम:- लालजी राय व सरोज राय
शैक्षिक योग्यता:- एमए इतिहास (सेंट स्टीफन कालेज दिल्ली)
मायका का पता :- ए603 पथिक विहार अपार्टमेंट सेक्टर 62 नोएडा
मूल निवासी :- बलिया
वर्तमान पता:- 3/204 विकास खंड गोमती नगर लखनऊ

युवाओं को संदेश :- जो भी कैरियर चुने, उसमें ईमानदारी से पूरा योगदान दें। मेहनत से कोई भी ऐसा लक्ष्य नहीं, जो पाया नहीं जा सकता। मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, जिंदगी की रंगत जरूर बदलती है।


पिता जी ने देखा सपना, मैंने साकार किया
नीरज वर्मा
झांसी। पिता जी ने सपना देखा मैंने कड़ी मेहनत करके साकार कर दिया। इसलिए आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे सुखद दिन है। यह बात मंगलवार को आईपीएस से आईएएस बनी गरिमा सिंह ने कही।
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आपकी जिंदगी को सफलता के मुकाम तक पहुंचाने में किसका योगदान है।
 
मेरे पिताजी ओंकारनाथ सिंह मुझसे बेहद प्यार करते हैं। जब मैं छोटी थी, तो उन्होंने आईएएस बनाने का सपना देखा था। मैंने भी मन में ठान लिया था कि मुझे आईएएस बनना है। मेरे प्रण के बारे में पिता जी जानते थे, इसलिए मेरे किसी भी फैसले पर उन्होंने विरोध नहीं किया। मेरा आईपीएस में वर्ष 2012 में चयन हुआ। पिताजी काफी खुश थे, मगर उनके दिल में आईएएस नहीं बन पाने की कसक जरूर रह गई थी। इसके चलते मैंने लगातार अपनी पढ़ाई और मेहनत जारी रखी। मेरा मानना है कि आज मैं जो कुछ भी हूं, वह सिर्फ पिताजी की वजह से हूं।

आपने आईपीएस होने के बाद इंजीनियर पति से शादी की। क्या आपके पति ने भी इस मुकाम तक पहुंचाने में आपका सहयोग किया?
 
जी हां, मेरे पति राहुल राय इंजीनियर हैं। स्टूडेंट लाइफ से ही मेरा उनसे अच्छा परिचय है। पति ने मुझे हमेशा से आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। कभी भी हार नहीं मानने की प्रेरणा दी। मेरी इस सफलता में मेरे पति का भी कम सहयोग नहीं है।
 
जिंदगी में जब भी मुश्किलों से सामना हुआ तो उनसे आपने कैसे निपटा?

जिंदगी में वैसे तो ऐसी कोई मुसीबत नहीं आई, जिसने विचलित किया हो। छोटी-मोटी मुश्किलें तो हरेक की जिंदगी में आती जाती रहती हैं, जिनसे विचलित नहीं होना चाहिए।
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एसपी सिटी रहते हुए पढ़ाई कैसे जारी रखी?
 
आईपीएस होने के बाद मेरी ट्रेनिंग के दौरान पढ़ाई छूट गई थी। पर, कुछ समय के बाद मैने पढ़ाई शुरू कर दी, क्योंकि मुझे अपने पिता जी के सपने को पूरा करना था। मैं दिन में नौकरी करती थी और रात को पढ़ाई करती थी। देर रात तक पढ़ाई करने के बाद सोती थी। नौकरी के बावजूद मैं कम से कम पांच घंटे रोज पढ़ाई के लिए समय निकाल लेती थी।

 आपकी जिंदगी का आदर्श वाक्य क्या है? जिसे आप भावी पीढ़ी को बताना चाहें।

 पढ़ाई में की गई मेहनत जिंदगी का रंग बदल देती है। पढ़ाई के लिए लगन होना बेहद जरूरी है।
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