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झांसी। आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य गणेश कुमार के फर्जी हस्ताक्षर से एक नर्स के एरियर भुगतान की कोशिश कराने का मामला प्रकाश में आया है। मामला संज्ञान में आने के बाद मंडलायुक्त ने झांसी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को बिल भुगतान पर रोक लगाने व जांच के आदेश दिए हैं।
मामला आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज से स्थानांतरित होकर झांसी मेडिकल कॉलेज आई एक नर्स के 3.8 लाख रुपये एरियर भुगतान का है। भुगतान के लिए सबसे पहले मुख्य चिकित्सा अधीक्षक झांसी द्वारा 30 जनवरी 2016 को आजमगढ़ प्रधानाचार्य को एक पत्र लिखा गया। पत्र में सीएमएस ने बताया है कि आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज से स्थानांतरित होकर आईं एक स्टाफ नर्स को ग्रेड पे 4600 का भुगतान आदेश दिया गया था लेकिन इनकी एलपीसी में ग्रेड 4600 के एरियर के भुगतान का कोई लेखा जोखा नहीं है।
इस पर सीएमएस ने ग्रेड पे का भुगतान करने अथवा नहीं करने की सूचना मांगी, ताकि नर्स को इसी वित्तीय वर्ष में ग्रेड पे का एरियर भुगतान किया जा सके। इसके बाद झांसी सीएमएस को आजमगढ़ प्राचार्य ने जवाबी पत्र लिखकर उक्त नर्स समेत दो का एरियर भुगतान अभी तक नहीं किए जाने की जानकारी दी। इसी पत्र में प्रधानाचार्य के फर्जी हस्ताक्षर होने का आरोप है।
शिकायतकर्ता का आरोप लगाया है कि करीब 3.8 लाख रुपये का 929 नंबर बिल का भुगतान कराने के लिए आजमगढ़ प्राचार्य के फर्जी हस्ताक्षर वाले पत्र संख्या 727 का इस्तेमाल किया गया। शिकायतकर्ता ने मंडलायुक्त से मामले की शिकायत कर बिल पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। साथ ही सबूत के तौर पर प्रधानाचार्य के दूसरे हस्ताक्षर वाला पत्र भी प्रस्तुत किया।
इस पर मंडलायुक्त ने मेडिकल कॉलेज झांसी के प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर को मामले की जांच के साथ-साथ बिल पर रोक लगाने के निर्देश दे दिए। कॉलेज प्राचार्य का कहना है कि मामले की जांच का जिम्मा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीशचंद्र आर्या को सौंपा गया है। उनकी रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।