फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jhansi News: गूगल पर ग्राहक सेवा नंबर खोजते ही खाते खंगाल रहे जालसाज

विज्ञापन
विज्ञापन
केस एक। फिल्टर रोड निवासी रविंद्र श्रीवास्तव ने एक डॉक्टर का नंबर गूगल पर तलाशा। गूगल से मिले नंबर पर उन्होंने बात की। इसके बाद जालसाज ने धोखे से उनके खाते से पांच लाख रुपये निकाल लिए। उन्होंने पुलिस को सूचना दी। कई माह बीत जाने के बावजूद जालसाज का पुलिस पता नहीं लगा सकी।
विज्ञापन




केस दो



नरिया बाजार निवासी राजकुमार अग्रवाल ने महंगा एसी खरीदा था। एसी खराब हो जाने पर गूगल पर उन्होंने कस्टमर केयर का नंबर तलाशा। गूगल पर उनको कंपनी का लिंक मिला। उस पर क्लिक करने पर साइट हूबहू कंपनी की तरह थी। उस पर दर्ज नंबर पर फोन करने के बाद जालसाज ने मैकेनिक भेजने के बहाने डिटेल ली। इसके बाद खाते से 3.17 लाख रुपये निकाल लिए। उनको भी अभी तक पैसा वापस नहीं मिल सका।


केस तीन

सदर बाजार निवासी पुष्प रंजन ने कुछ दिनों पहले जोमैटो से पिज्जा आर्डर किया था। आर्डर न आने पर उन्होंने उसे रद्द कर दिया लेकिन रिफंड नहीं आया। उन्होंने गूगल के सहारे कस्टमर केयर का नंबर तलाशा। वहां फोन करने पर रिफंड के लिए उनको एक लिंक भेजा। लिंक पर क्लिक करने के बाद उनके खाते से 49 हजार रुपये निकल गए।
विज्ञापन




अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। ये महज कुछ मामले हैं जिनमें लोगों को गूगल पर ग्राहक सेवा नंबर तलाशना भारी पड़ गया। पिछले छह माह के दौरान 43 मामले सामने आ चुके जिनमें गूगल पर कस्टमर केयर, चिकित्सक, नर्सिंग होम समेत किसी कंपनी का नंबर तलाशने के दौरान लोग साइबर जालसाजों का शिकार होकर अपनी रकम गवां बैठे। ये मामले साइबर थाने तक भी पहुंचे हैं।



साइबर विशेषज्ञ डा. राजीव त्रिपाठी का कहना है कि साइबर जालसाज बड़ी आसानी से लिंक के सहारे ठगी करते हैं। सबसे आसान शिकार गूगल के जरिये कस्टमर केयर का नंबर तलाशने वाले बनते हैं। वहां से मिले नंबर पर फोन कर लोग खुद ही जालसाज के शिकार हो जाते हैं। कई मामले ऐसे भी सामने आए जिसमें गूगल पर कंपनी तलाशने पर हूबहू असली की तरह दिखने वाली नकली वेबसाइट तक पहुंचा दिया जाता है। इसके बाद वह जालसाजी का शिकार हो गए। वहीं, साइबर थाना प्रभारी चंद्रदेव यादव का कहना है कि साइबर जालसाजों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, लेकिन साइबर जालसाजी से बचने के लिए लोगों को जागरूक होना जरूरी है।
विज्ञापन




इनसेट



यह सावधानी बरतने की जरूरत

-गूगल पर नंबर सर्च करने से बचना चाहिए। किसी अन्य माध्यम से इसका पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए।



-किसी अंजान लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। लिंक क्लिक करने के बाद अगर यूआरएल के साथ ताले का निशान बनकर आए तभी आगे बढ़ना चाहिए।

-अगर किसी तरह की जालसाजी का आभास हो तब मोबाइल स्विच ऑफ करके उसे फ्लाइट मोड में डाल देना चाहिए।



-हमेशा सुनिश्चित करें कि आप आधिकारिक वेबसाइट पर ही हैं।

-यदि लगता है कि बैंक खाते से छेड़छाड़ की गई है तो तुरंत बैंक एवं पुलिस को सूचित करें।



साइबर अपराध का शिकार होने पर ये करें



- तत्काल अपना एटीएम व बैंक खाता लॉक कराएं।



- नजदीकी थाने या पुलिस लाइन स्थित साइबर थाने में सूचना दें।



- सूचना साइबर थाने के नंबर 7839876648 तथा डायल 112 पर भी दी जा सकती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें